ऑपरेशन उमंग सेवन में उमंग की जगह मिला दर्द

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11 वर्षीय बालक के लिए रातभर भटकती रही मां, संप्रेषण गृह के बाहर धरने पर बैठे परिजन; व्यवस्था पर उठे सवाल

चूरू। जिले में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और बाल तस्करी के उन्मूलन के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन उमंग सेवन” के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बाल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 11 वर्षीय बालक के परिजनों को पूरी रात उसके लिए भटकना पड़ा और मां अपने बेटे से मिलने की गुहार लगाते हुए संप्रेषण गृह के बाहर आंसू बहाती रही।जानकारी के अनुसार, सरदारशहर क्षेत्र से एक 11 वर्षीय बालक को रेस्क्यू कर राजकीय संप्रेषण गृह स्थित बाल कल्याण समिति के समक्ष लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि रेस्क्यू के दौरान बालक के साथ मारपीट की गई और बाद में उसके माता-पिता को उससे मिलने तक नहीं दिया गया।हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

“रात तीन बजे तक रोती रही मां”

गांव काकलासर के सरपंच राजू सिंह ने बताया कि बालक को शनिवार शाम करीब पांच बजे उसके चाचा की दुकान से रेस्क्यू किया गया था। परिजनों का कहना है कि परिवार में शादी समारोह होने के कारण बालक अपने नए कपड़े लेने के लिए चाचा की दुकान पर गया था।बालक के माता-पिता जब उसे लेने संप्रेषण गृह पहुंचे तो उन्हें देर रात तक इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि रात तीन बजे तक बालक की मां बंद गेट के बाहर खड़ी होकर बेटे से मिलने की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी।

बाल कल्याण समिति का सदस्य नहीं मिलने का आरोप

परिजनों के अनुसार, बालक को राजकीय संप्रेषण गृह लाए जाने के बाद वहां बाल कल्याण समिति का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इसके बावजूद बालक को परिजनों के सुपुर्द नहीं किया गया।मामले में काकलासर सरपंच ने यह भी आरोप लगाया कि बालक को परिजनों को सौंपने के बदले रुपयों की मांग की गई। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

संप्रेषण गृह के बाहर धरने पर बैठे परिजन

घटना से आक्रोशित परिजनों ने देर रात संप्रेषण गृह के बाहर धरना शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति की जानकारी ली।बताया जा रहा है कि पुलिस की दखल के बाद संबंधित जिम्मेदारों से संपर्क किया गया, जिसके पश्चात बालक को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने बाल संरक्षण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अभियान का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है, उसी व्यवस्था में एक मां को अपने बेटे से मिलने के लिए पूरी रात इंतजार करना पड़ा।अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और क्या बाल संरक्षण से जुड़े संस्थानों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

जांच की उठी मांग

परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे प्रकरण को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।