एचआरपी गर्भवतियों से सीधे संवाद कर लिया फीडबैक, लेबर रूम, दवा स्टॉक और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा
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झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने गुरूवार को एमसीएचएन (मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण) दिवस के अवसर पर उप जिला अस्पताल चिड़ावा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का बारीकी से मूल्यांकन करते हुए अस्पताल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।निरीक्षण के समय ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संत कुमार जांगिड़ भी मौजूद रहे। सीएमएचओ डॉ. गुर्जर ने अस्पताल में भर्ती एचआरपी गर्भवती महिलाओं एवं अन्य मरीजों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का फीडबैक लिया। उन्होंने प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक लैब जांच, चिकित्सकीय परामर्श, आयरन एवं कैल्शियम सहित जरूरी दवाओं की उपलब्धता, समय पर उपचार तथा स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।इसके बाद उन्होंने अस्पताल के लेबर रूम का निरीक्षण कर साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाएं, प्रसव संबंधी उपकरणों की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं के स्टॉक तथा आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं एवं संसाधनों की भी विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने कहा कि उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श, दवाओं की उपलब्धता और समय पर रेफरल सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक एचआरपी महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक एचआरपी महिला का नियमित फॉलोअप किया जाए, निर्धारित समय पर सभी आवश्यक जांचें कराई जाएं तथा प्रसव तक निरंतर निगरानी रखी जाए। जिन महिलाओं को उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता हो, उन्हें समय रहते सक्षम स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफर किया जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक, आवश्यक संसाधनों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की भी समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एमसीएचएन दिवस का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों तक समग्र और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है तथा प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान पर इन सेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।वहीं, प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) डॉ. दयानंद सिंह ने पीएचसी टीबा बसई का निरीक्षण कर वहां एचआरपी महिलाओं के सुरक्षित मातृत्व के लिए किए जा रहे कार्यों एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।










