हाईकोर्ट के आदेश पर परसरामपुरा स्टेडियम से अतिक्रमण हटाया

विरोध में उतरे पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा सहित करीब 200 लोग हिरासत में, 400 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में चली कार्रवाई

नवलगढ़ । झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
नवलगढ़ क्षेत्र के परसरामपुरा गांव में बुधवार सुबह खेल स्टेडियम से अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की पालना में प्रशासन ने भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में स्टेडियम परिसर में बनी चारदीवारी को जेसीबी मशीनों से हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई का विरोध कर रहे पूर्व चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा, उनके भाई डॉ. राजपाल शर्मा सहित करीब 200 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रशासन द्वारा तय रणनीति के तहत सुबह करीब सात बजे कार्रवाई शुरू की गई। नदी के बहाव क्षेत्र में बनी स्टेडियम की चारदीवारी को हटाने के लिए जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंचीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। कार्रवाई का विरोध करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा अपने समर्थकों के साथ मौके पर धरने पर बैठ गए और गिरफ्तारी दी। उनके भाई डॉ. राजपाल शर्मा ने भी गिरफ्तारी देकर प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध जताया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता एवं सेवानिवृत्त शिक्षक रामनिवास शास्त्री भी मौके पर पहुंचे और स्वयं गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र राजावत ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। बाद में पुलिस ने उन्हें एंबुलेंस के जरिए हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम से ही ग्रामीण और समर्थक स्टेडियम परिसर के बाहर धरने पर बैठे हुए थे। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की। उनका कहना था कि यह खेल स्टेडियम क्षेत्र के युवाओं के भविष्य और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसे बचाया जाना चाहिए। विवाद की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने परसरामपुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। करीब 400 पुलिसकर्मियों का जाब्ता तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में नदी के बहाव क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाना आवश्यक था। एएसपी देवेंद्र राजावत ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल लगाया गया था तथा अब तक करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें स्वयं गिरफ्तारी देने वाले और कार्रवाई का विरोध करने वाले दोनों शामिल हैं। वहीं एडीएम डॉ. अजय आर्य ने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेशानुसार की गई है।