मंत्री झाबर सिंह खर्रा बोले— करणीराम-रामदेव का संघर्ष सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी मिसाल, 75वें बलिदान दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, शहीदों के जयघोष से गूंजा स्मारक स्थल
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जागीरदारी प्रथा के खिलाफ किसानों, मजदूरों, शोषित और वंचित वर्ग के अधिकारों की लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीद करणीराम-रामदेव का 75वां बलिदान दिवस बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट स्थित स्मारक स्थल पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। समारोह में प्रदेशभर से पहुंचे प्रबुद्धजन, जनप्रतिनिधि और हजारों लोग शामिल हुए। समारोह के मुख्य अतिथि नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जागीरदारी प्रथा के उन्मूलन में शहादत देने वाले अमर शहीदों की बदौलत ही आजादी को वास्तविक सार्थकता मिली। उन्होंने कहा कि इन शहीदों के संघर्ष से किसान, मजदूर और शोषित वर्ग को न्याय एवं अधिकार प्राप्त हुए। खर्रा ने कहा कि देश की आजादी के सात दशक बाद भी इन महान शहीदों को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इनकी जीवनी और संघर्ष से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को स्मारक के समीप मुख्य मार्ग का नाम “अमर शहीद करणीराम-रामदेव मार्ग” करने के निर्देश भी दिए।।समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. घासीराम वर्मा ने की। मंच पर झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, मंडावा विधायक रीटा चौधरी, जिला कलक्टर डॉ. अरूण गर्ग, भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी, उपभोक्ता प्रतितोष आयोग अध्यक्ष मनोज मील, पूर्व सांसद नरेंद्र खीचड़, शहीद करणीराम के दत्तक पुत्र सरदार सिंह मील, शहीद रामदेव के अनुज राधाकृष्ण, सुपुत्री मनभरी देवी तथा डॉ. वीरेंद्र सिंह मौजूद रहे।कार्यक्रम की शुरुआत दोनों अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान पूरा परिसर शहीदों के जयघोष से गूंज उठा। शहीद परिवारों के सुरेश गिल, एडवोकेट मदन गिल एवं नरेंद्र गिल ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि पूर्व संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग हरिराम महण ने स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम परिचय प्रस्तुत किया। जयपुर से पहुंचे प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने शहीदों के अतुलनीय बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उपभोक्ता प्रतितोष आयोग अध्यक्ष मनोज मील ने सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से शहीदों की गौरवगाथा को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सकारात्मक पहल करने का आह्वान किया। जिला कलक्टर डॉ. अरूण गर्ग ने कहा कि पूरे भारत में ऐसा उदाहरण दुर्लभ है, जहां मृत्यु निश्चित होने के बावजूद आमजन के अधिकारों के लिए लोग हंसते-हंसते बलिदान दे दें। विधायक राजेंद्र भांबू, विधायक रीटा चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी और शिक्षाविद् दयाराम महरिया ने भी श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।वीरवर झुंझार सिंह संस्थान के अध्यक्ष सुरेश जाखड़ एवं व्यवस्थापक महेंद्र चौधरी ने मंत्री झाबर सिंह खर्रा का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। स्मारक के समीप मुख्य मार्ग का नाम “अमर शहीद करणीराम-रामदेव मार्ग” करने की घोषणा की गई ॥ भामाशाह शिवकरण जानू द्वारा शेखावाटी क्षेत्र के जागीरदारी प्रथा उन्मूलन आंदोलन के शहीदों का मेमोरियल बनाने की घोषणा की गई ।
पुस्तक का विमोचन, भामाशाहों का सम्मान
समारोह में पूर्व सांसद एवं विधायक स्व. शिवनाथ गिल द्वारा शहीदों पर लिखी पुस्तक के चतुर्थ संस्करण का विमोचन किया गया। स्मारक संयोजक विजयगोपाल मोटसरा ने स्मारक के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यकरण में सहयोग देने वाले भामाशाहों का परिचय कराया, जिनका अतिथियों ने सम्मान किया। सम्मानित होने वालों में सीकर के नंदलाल चौधरी, सुरेश जाखड़, सीए डॉ. रोहित चौधरी, हरिराम महन, ताराचंद गुप्ता, कुरड़ाराम धीवा, एडवोकेट संजीव महला, इंजी. प्यारेलाल ढूकिया, नेमीचंद बाबल, कुंभाराम डोगीवाल, बाबूलाल थालौड़, राजन चौधरी, निरंजन जानू, रामस्वरूप गजराज, बनवारी चनाना, हरिराम चंदवा एवं मनफूल बिजारणियां शामिल रहे। भोजासर के पूर्व प्रधानाचार्य प्यारेलाल मीणा ने शहीदों पर आधारित गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावुक बना दिया। इस वर्ष समारोह के आयोजक शहीद रामदेव के सुपुत्र सुरेश गिल रहे, जिन्होंने हाल ही में स्मारक स्थल का नवीनीकरण एवं सौंदर्यकरण करवाया। ताराचंद गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। मंच संचालन नेशनल यूथ आइकॉन एडवोकेट विजयहिंद जालिमपुरा ने किया। इससे पूर्व विद्यार्थी भवन जाट बोर्डिंग में भी प्रबुद्धजनों ने शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
प्रदेशभर से पहुंचे प्रबुद्धजन
समारोह में पूर्व एडीएम चंदगीराम झाझड़िया, डॉ. हनुमान प्रसाद, गुलजारीलाल कालेर, पितराम गोदारा, अमीलाल मुंड, जयलाल आबूसरिया, अमर नूनिया, कृष्ण गावड़िया, देवकी तुलस्यान, अम्बेडकर वेलफेयर सोसाइटी के महावीर सानिल, संपतराम बारूपाल, पवन कड़वासरा, डॉ. जेपी बुगालिया, पतंजलि प्रदेश प्रतिनिधि पवन सैनी, नितिन अग्रवाल, सत्यदेव दड़िया, मनीराम कुलहरी, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के रामनिवास डूडी, सीताराम दींवा, लक्ष्मण मील, कुलदीप पुनिया, दिनेश सूंडा, प्रमोद बुडानिया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।













