“आरजीएचएस बना कर्मचारियों की पीड़ा का कारण”

इलाज के लिए दर-दर भटक रहे कर्मचारी, सरकार को चेतावनी; झुंझुनूं से उठी व्यवस्था सुधार की जोरदार मांग

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी आरजीएचएस योजना को लेकर अब कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। झुंझुनूं में मंत्रालयिक कर्मचारी जिला समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए आरजीएचएस योजना की अव्यवस्थाओं पर तीखा रोष जताया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो हजारों परिवारों की पीड़ा बड़ा आंदोलन बन सकती है। समिति अध्यक्ष राजेश बजाड़, महामंत्री शैतान सिंह तथा कोषाध्यक्ष नगेन्द्र हाड़ा के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा कि जिस आरजीएचएस योजना को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में लागू किया गया था, वही आज कर्मचारियों के लिए चिंता, आर्थिक बोझ और मानसिक प्रताड़ना का कारण बनती जा रही है। ज्ञापन में भावुक शब्दों में कहा गया कि कर्मचारी हर माह अपनी मेहनत की कमाई से अंशदान जमा करता है, लेकिन बीमारी की स्थिति में अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई अस्पताल योजना के तहत इलाज देने से बच रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को अपनी जेब से भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सीमित वेतन में परिवार का पालन-पोषण करने वाले कर्मचारी महंगी चिकित्सा व्यवस्था के सामने पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं। योजना से जो उम्मीदें थीं, वे अब टूटती नजर आ रही हैं। समिति ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी नियमित अंशदान दे रहे हैं तो फिर उन्हें इलाज के लिए भटकना क्यों पड़ रहा है? क्या यही एक कल्याणकारी राज्य की भावना है? ज्ञापन में सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। जिनमें आरजीएचएस योजना को तत्काल प्रभाव से सुचारू रूप से बहाल किया जाए , जिन कर्मचारियों ने विवश होकर निजी खर्च पर इलाज करवाया है, उन्हें शीघ्र भुगतान और उचित हर्जाना दिया जाए और योजना की शर्तों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर उनकी मान्यता समाप्त की जाए। समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी और उम्मीदों से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों की यह पीड़ा बड़े जनआक्रोश का रूप ले सकती है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। झुंझुनूं से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश के कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है और आने वाले दिनों में आरजीएचएस व्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।