सभापति बनते ही बोले—‘पूरा झुंझुनूं हमारा है, भेदभाव नहीं होगा’; टूटी सड़कें, जलभराव और सफाई व्यवस्था सुधारना रहेगी पहली प्राथमिकता
झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
नगर परिषद सभापति के चुनाव में कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान ने भाजपा के मनु धनखड़ को 10 मतों के अंतर से हराकर सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। अब्दुल्ला को 35 वोट, जबकि मनु धनखड़ को 25 वोट मिले। चुनाव परिणाम के साथ ही नगर परिषद की नई सियासी तस्वीर साफ हो गई। खास बात यह रही कि सदन में कांग्रेस के पास 30 पार्षद होने के बावजूद उसके प्रत्याशी को 35 वोट मिले। इससे साफ है कि सभापति चुनाव तक कांग्रेस अपने पक्ष में अतिरिक्त समर्थन जुटाने में सफल रही। अब चुनावी जोड़-तोड़ और राजनीतिक दांव-पेंच का दौर खत्म हो चुका है। 35 वोटों से मिली जीत के बाद अब अब्दुल्ला अगवान के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस राजनीतिक समर्थन को शहर के विकास में बदलने की है। सभापति पद संभालते ही उन्होंने शहर की उन समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बताया, जिनसे आमजन लंबे समय से जूझ रहा है।
‘काम कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखाई देना चाहिए’
सभापति अब्दुल्ला अगवान ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता टूटी सड़कों और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है। उन्होंने कहा कि प्रयास रहेगा कि विकास कार्य केवल कागजों में दर्ज होकर न रह जाएं, बल्कि उनका असर जमीन पर दिखाई दे। शहरवासियों को विकास का वास्तविक बदलाव महसूस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन उनका प्रयास प्राथमिकता तय कर एक-एक समस्या का समाधान करने का रहेगा।
अब्दुल्ला ने शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाना अपनी दूसरी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़-दो साल में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। चैंबर, नालियों और जलभराव जैसी समस्याओं का समाधान जरूरी है। शहर को साफ-सुथरा बनाने के साथ आमजन को रोजमर्रा की समस्याओं से राहत दिलाने पर विशेष जोर रहेगा। उन्होंने सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला के शहर के विकास संबंधी उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसद के सुपरविजन में शहर के अधिक से अधिक विकास की दिशा में मिलकर काम किया जाएगा। सभापति चुनाव के बाद अब्दुल्ला अगवान ने सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भेदभाव रहित विकास को लेकर दिया। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में 60 वार्ड हैं और सभी पार्षदों को साथ लेकर चलना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“पूरा झुंझुनूं शहर हमारा है। हम किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे।”
अब्दुल्ला ने कहा कि हर वार्ड की जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए जरूरत के हिसाब से विकास कार्य करवाने का प्रयास किया जाएगा। उनका लक्ष्य पूरे शहर का समान विकास करना है। सभापति चुनाव में मिले 35 वोटों ने अब्दुल्ला अगवान को स्पष्ट बहुमत दिया है, लेकिन राजनीतिक जीत के बाद उनकी असली परीक्षा नगर परिषद के कामकाज में होगी। सड़क, सफाई, जलभराव और नालियों जैसी बुनियादी समस्याएं ही नई परिषद के कामकाज का पहला पैमाना बनेंगी। कांग्रेस ने सभापति पद पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। अब्दुल्ला अगवान के सामने चुनौती यह है कि चुनाव के दौरान मिले अतिरिक्त समर्थन को परिषद के भीतर सहयोग में बदलते हुए 60 वार्डों में विकास की ऐसी तस्वीर पेश करें, जिससे ‘पूरा शहर हमारा है’ का उनका संदेश जमीन पर भी दिखाई दे।














