कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान के बाद वीरेंद्र डारा बने उपसभापति , 44 वोट लेकर भाजपा के बुधराम सैनी को 28 मतों से हराया, 30 के आंकड़े वाली कांग्रेस ने दोनों पदों पर बनाया बहुमत का समीकरण
झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
राजस्थान में भाजपा की सरकार होने के बावजूद शहर की शहरी सत्ता का नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में चला गया है। सभापति के बाद अब उपसभापति पद पर भी कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया है। मंगलवार को हुए उपसभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र डारा ने भाजपा के बुधराम सैनी को 28 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। डारा को 44 वोट, जबकि सैनी को 16 वोट मिले। इस जीत के साथ ही 60 सदस्यीय झुंझुनूं नगर परिषद में सभापति और उपसभापति दोनों पद कांग्रेस के खाते में आ गए हैं। चुनाव परिणामों में कांग्रेस 30 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी, जबकि भाजपा और निर्दलीयों के खाते में 15-15 सीटें आई थीं।
30 की ताकत से शुरू हुआ सफर, दोनों पद कांग्रेस के नाम
नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीय 15 पार्षद चुने गए थे। 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 31 वोट जरूरी थे। यानी कांग्रेस अपने दम पर बहुमत से महज एक कदम दूर थी। इसके बावजूद सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला अगवान को 35 वोट मिले और अब उपसभापति चुनाव में वीरेंद्र डारा का आंकड़ा बढ़कर 44 वोट पहुंच गया। मंगलवार को परिषद के सभी 60 पार्षदों ने मतदान किया। मतगणना में डारा को 44 और भाजपा के बुधराम सैनी को 16 मत मिले। इस तरह डारा ने 28 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
अब्दुल्ला के बाद डारा—लगातार दूसरे दिन कांग्रेस की बड़ी जीत
21 सितंबर को हुए सभापति चुनाव में कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान ने भाजपा के मनु धनखड़ को 10 मतों से हराया था। अब्दुल्ला को 35 और धनखड़ को 25 वोट मिले थे। एक दिन बाद उपसभापति चुनाव में कांग्रेस ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। अब्दुल्ला अगवान के बाद वीरेंद्र डारा की जीत ने नगर परिषद में कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ को और स्पष्ट कर दिया है।
ओला की रणनीति और निर्दलीयों का समर्थन बना अहम कड़ी
इस पूरे घटनाक्रम में सांसद बृजेंद्र सिंह ओला की भूमिका कांग्रेस के स्थानीय राजनीतिक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। चुनाव के दौरान ओला ने कांग्रेस के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई और सभापति पद के बाद उपसभापति पद के लिए भी वीरेंद्र डारा के नाम को आगे बढ़ाया। स्थानीय रिपोर्टों में भी सभापति चुनाव के दौरान ओला की सक्रियता और निर्दलीय वीरेंद्र डारा के कांग्रेस के पक्ष में खड़े होने से नगर परिषद में सभापति और उपसभापति दोनों पद हासिल कर लिए। उपसभापति चुनाव में डारा को मिले 44 वोट यह बताते हैं कि कांग्रेस अपने 30 पार्षदों के अलावा निर्दलीय खेमे में भी व्यापक समर्थन जुटाने में सफल रही। 44 -16 का आंकड़ा केवल जीत नहीं, बल्कि मतदान के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस की बढ़ी हुई पकड़ को भी सामने लाता है।
राज्य में भाजपा सरकार, लेकिन झुंझुनूं की शहरी सरकार कांग्रेस के पास
झुंझुनूं नगर परिषद का परिणाम स्थानीय निकाय की राजनीति के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण है। राज्य में भाजपा की सरकार है, लेकिन 60 सदस्यीय झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस ने सभापति और उपसभापति दोनों पद हासिल कर लिए। हालांकि इसे राज्य सरकार के खिलाफ सीधे विधानसभा स्तर के जनादेश के रूप में देखना उचित नहीं होगा, क्योंकि नगर निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, पार्षदों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से भी प्रभावित होते हैं। लेकिन इतना स्पष्ट है कि झुंझुनूं नगर परिषद के बोर्ड संचालन की कमान फिलहाल कांग्रेस के हाथ में है।
निकाय चुनाव के बाद ओला खेमे की रणनीतिक बढ़त
झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस के सामने शुरूआत में संख्या बल की चुनौती थी। 30 पार्षदों के साथ पार्टी बहुमत से एक सीट दूर थी। ऐसे में निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में थे। सभापति चुनाव में 35 वोट और उपसभापति चुनाव में 44 वोट हासिल करना कांग्रेस की ओर से किए गए राजनीतिक समन्वय का परिणाम रहा। जिले के 19 निकायों के अध्यक्ष-सभापति चुनावों में भी कांग्रेस ने 10 निकायों में अध्यक्ष-सभापति पद हासिल किए, जबकि भाजपा को 8 और एक निकाय में निर्दलीय को सफलता मिली। ऐसे में झुंझुनूं नगर परिषद में अब्दुल्ला अगवान और वीरेंद्र डारा की लगातार दो जीत ने स्थानीय निकाय की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति मजबूत की है। खास तौर पर सांसद बृजेंद्र सिंह ओला की सक्रियता के बीच दोनों शीर्ष पद कांग्रेस के खाते में जाना उनके स्थानीय राजनीतिक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
अब असली चुनौती—जीत के बाद बोर्ड चलाने की
चुनावी गणित कांग्रेस के पक्ष में जरूर गया है, लेकिन आगे बोर्ड संचालन में 15 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में सभापति अब्दुल्ला अगवान और उपसभापति वीरेंद्र डारा के सामने राजनीतिक समर्थन को विकास के एजेंडे में बदलने की चुनौती होगी। फिलहाल झुंझुनूं नगर परिषद की तस्वीर साफ है—30 पार्षदों वाली कांग्रेस ने बहुमत से एक सीट कम होने के बावजूद दोनों शीर्ष पद अपने नाम कर लिए हैं और शहर की शहरी सत्ता की कमान कांग्रेस के हाथ में है।
डारा बोले – सभी पार्षदों का विश्वास मिला, टीम के रूप में करेंगे काम
जीत के बाद वीरेंद्र डारा ने सभी पार्षदों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें सभी पार्षदों का विश्वास मिला और इसी वजह से उन्हें 44 वोट प्राप्त हुए। डारा ने सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला, डॉ. राजबाला और अमित ओला के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया। वीरेंद्र डारा ने कहा कि वे सभापति अब्दुल्ला अगवान के साथ टीम के रूप में काम करेंगे और झुंझुनूं शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए प्रयास करेंगे। उनके इस बयान के साथ अब नगर परिषद में अगवान-डारा की जोड़ी के सामने चुनावी जीत को शहर के विकास और बोर्ड के कामकाज में बदलने की चुनौती होगी।














