चूरू में ऋषि कुमारों ने अर्पित की पुष्पांजलि, डॉ. सप्तर्षि मिश्र ने सुनाए संस्मरण; बीकानेर में केसर की वर्षा और चातुर्मास से जुड़े प्रसंगों का किया उल्लेख
चूरू। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में शंकराचार्य स्मृति वंदन सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को चूरू धर्म संघ विश्वविद्यालय एवं गुरुकुल ब्रह्मचर्याश्रम परिसर में कार्यक्रम आयोजित कर जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। ऋषि कुमारों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. सप्तर्षि मिश्र ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज का चूरू के भक्तों से विशेष जुड़ाव था। उनके अनुसार, शंकराचार्य जी जब बीकानेर या जोधपुर की यात्रा पर जाते थे, तब चूरू रेलवे स्टेशन पर रुककर स्नान करते और भक्तों को संबोधित करते थे। डॉ. मिश्र ने बताया कि शंकराचार्य जी के आह्वान पर गुरुकुल के विद्यार्थी प्रतिवर्ष 7 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर वर्ष 1966 के गोरक्षा आंदोलन में जान गंवाने वाले गोभक्तों को श्रद्धांजलि देते थे।
गुरुकुल शिक्षा को बताया प्रमुख प्रकल्प
डॉ. मिश्र ने कहा कि धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज द्वारा स्थापित अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ के माध्यम से विभिन्न प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। इनमें गुरुकुल को प्रमुख प्रकल्प बताते हुए उन्होंने कहा कि काशी, दिल्ली, वृंदावन, कानपुर, श्रीगंगानगर, भादरा और बीकानेर सहित विभिन्न स्थानों पर धर्म संघ महाविद्यालय के नाम से इसकी शाखाएं संचालित हैं।
उन्होंने स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से धर्म संघ विश्वविद्यालय के नाम से गुरुकुल ब्रह्मचर्याश्रम की स्थापना हुई। उन्होंने बताया कि यह कार्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री कृष्णबोधाश्रम जी महाराज, धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज के आशीर्वाद तथा जनसहयोग से आगे बढ़ा। डॉ. मिश्र के अनुसार, स्वामी जी का उद्देश्य चूरू को काशी के स्वरूप में विकसित करना और 1,000 विद्यार्थियों को तैयार करना था।
ऋषिकुल में भी हुई पुष्पांजलि सभा
सायंकाल 5:30 बजे सेठ जयदयाल गोयन्दका द्वारा स्थापित श्री ऋषिकुल परिसर में भी पुष्पांजलि सभा आयोजित हुई। ऋषि कुमारों और आचार्यों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. सप्तर्षि मिश्र ने उन्हें महान सिद्ध संत और दयालु महापुरुष बताया। उन्होंने 1978 में बीकानेर में आयोजित यज्ञ से जुड़ा एक संस्मरण साझा करते हुए वहां ‘केसर की वर्षा’ होने का उल्लेख किया।
ऋषिकुल के प्राचार्य डॉ. भवानी शंकर शर्मा ने भी शंकराचार्य जी से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने बीकानेर में चातुर्मास के दौरान ‘धर्म नगर द्वार’ के निर्माण से जुड़ा प्रसंग सुनाया। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने द्वार के नाम को लेकर आपत्ति जताई थी। इस पर शंकराचार्य जी ने ‘धर्म’ शब्द को किसी एक धर्म तक सीमित न मानने की बात कही, जिसके बाद विवाद समाप्त हो गया और द्वार निर्माण को समर्थन मिला।
डॉ. शर्मा ने बीकानेर में कथित केसर की वर्षा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं उस यज्ञ के दर्शन किए थे। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य को “बहुत बड़ा तार्किक” बताते हुए उनके विचार और तर्कशक्ति को याद किया।
कार्यक्रम में गुरुकुल प्रबंधन से जुड़े चानण मल सारस्वा, प्रकाश शर्मा, आचार्य महेश शर्मा, प्राचार्य परमानंद पाण्डेय, आचार्य महेश गौड़, जबकि ऋषिकुल की सभा में प्रबंधक ईश्वर सिंह राठौड़, आचार्य महेश शर्मा, आचार्य दामोदर शर्मा और जयपुर से आए गजेन्द्र दीक्षित सहित अन्य लोग मौजूद रहे।














