निशुल्क मिर्गी चिकित्सा शिविर में 525 मरीजों को मिला उपचार, एक माह की दवाइयां भी वितरित

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384वें शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी स्वास्थ्य संबंधी सलाह; डॉ. आर.के. सुरेका बोले— समय पर इलाज से मिर्गी पीड़ित बच्चे जी सकते हैं सामान्य जीवन

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चूरू। त्रिवेणी देवी सुरेका चैरिटेबल ट्रस्ट, रतननगर की इकाई एपिलेप्सी केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से आयोजित 384वें निशुल्क मिर्गी चिकित्सा शिविर में राजस्थान सहित पड़ोसी राज्यों से आए 525 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया तथा उन्हें एक माह की निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई।
शिविर के दौरान वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट एवं एपिलेप्टोलॉजिस्ट डॉ. आर.के. सुरेका ने कहा कि इस बार शिविर का मुख्य संदेश “बच्चों में मिर्गी—सही जानकारी, समय पर उपचार और सुरक्षित भविष्य” रहा। उन्होंने बताया कि बच्चों में मिर्गी के अधिकांश मामलों का प्रभावी उपचार संभव है और समय पर बीमारी की पहचान कर इलाज शुरू करने से वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।उन्होंने कहा कि समाज में मिर्गी को लेकर आज भी कई भ्रांतियां और अंधविश्वास फैले हुए हैं। अभिभावकों को ऐसे भ्रमों से बचते हुए योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित उपचार कराना चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाइयां बंद करना नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही पर्याप्त नींद, समय पर दवा और नियमित फॉलोअप उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।डॉ. सुरेका ने बताया कि यदि किसी बच्चे को दौरा पड़े तो घबराने के बजाय उसे सुरक्षित स्थान पर करवट के बल लिटाना चाहिए तथा आसपास की नुकीली या खतरनाक वस्तुएं हटा देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दौरे के दौरान मरीज के मुंह में कोई वस्तु डालने या पानी पिलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि मिर्गी से पीड़ित बच्चों को शिक्षा, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों से दूर न रखें। उचित उपचार और परिवार के सकारात्मक सहयोग से ऐसे बच्चे भी अन्य बच्चों की तरह सामान्य, सक्रिय और सफल जीवन जी सकते हैं।शिविर में डॉ. जय सिंह, डॉ. एफ.एच. गौरी, डॉ. अभिनव सरीन, डॉ. रोहित सुरेका, डॉ. रक्षित सुरेका, तजु खान सहित चिकित्सकों और सहयोगी टीम ने अपनी सेवाएं दीं। बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों ने शिविर में पहुंचकर निशुल्क चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाया।