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बहुमत से एक कदम पीछे कांग्रेस ने लगाई चार छलांग आगे, झुंझुनूं में फिर कांग्रेस का बोर्ड

झुंझुनूं नगर परिषद के नवनिर्वाचित सभापति अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान समर्थकों का अभिवादन करते हुए

अब्दुल्ला अगवान 35 वोट लेकर सभापति निर्वाचित, भाजपा के मनु धनखड़ को 25 वोट; 30 से शुरू हुई कांग्रेस 35 तक पहुंची, भाजपा 15 से 25 पर पहुंची—ओला की रणनीति सफल, वीरेंद्र डारा बने निर्णायक कड़ी, विधायक भांबू ने भी बढ़ाया भाजपा का आंकड़ा

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
60 सदस्यीय झुंझुनूं नगर परिषद की सत्ता को लेकर चली सियासी रस्साकशी का सोमवार को पटाक्षेप हो गया। कांग्रेस ने बहुमत के जादुई आंकड़े 31 से महज एक कदम पीछे 30 पार्षदों के साथ चुनाव शुरू किया था, लेकिन सभापति के मतदान में यही कांग्रेस 35 वोट तक पहुंच गई। कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान ने भाजपा के मनु धनखड़ को 10 मतों से शिकस्त देकर सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। अगवान को 35 और धनखड़ को 25 वोट मिले। परिणाम के साथ ही झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

इस चुनाव ने सिर्फ सभापति तय नहीं किया, बल्कि झुंझुनूं की स्थानीय राजनीति में सांसद बृजेंद्र सिंह ओला और विधायक राजेंद्र भांबू की राजनीतिक रणनीति तथा पार्षदों को अपने पाले में रखने की क्षमता की भी परीक्षा ली। कांग्रेस के लिए इस पूरे खेल में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बने वार्ड नंबर 9 से निर्दलीय निर्वाचित वीरेन्द्र डारा अगवान के नामांकन में डारा प्रस्तावक बने थे,घटनाक्रम ने मतदान से पहले ही कांग्रेस के पक्ष में राजनीतिक समीकरणों का संकेत दे दिया था।

30 के बाद पहला गेमचेंजर बने वीरेन्द्र डारा, फिर 35 तक पहुंची कांग्रेस

निकाय चुनाव के परिणाम में कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीयों के 15 पार्षद निर्वाचित हुए थे। 60 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 31 वोट जरूरी थे। यानी कांग्रेस को सत्ता के लिए केवल एक अतिरिक्त वोट चाहिए था, जबकि भाजपा को 16 अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाना था।

यहीं से निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो गई। वीरेन्द्र डारा, जो वार्ड नंबर 9 से निर्दलीय चुनाव जीते और जिन्हें स्थानीय राजनीतिक हलकों में कांग्रेस समर्थित तथा सांसद बृजेंद्र सिंह ओला के काफी नजदीकी माना जाता है, ने कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला अगवान के नामांकन में प्रस्तावक बनकर महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिया। अंतिम मतदान में अगवान को कुल 35 वोट मिले, यानी कांग्रेस को अपने 30 पार्षदों के अलावा पांच अतिरिक्त मत प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट है कि निर्दलीय खेमे के वोट निर्णायक रूप से बंटे और कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई।

ओला की रणनीति के केंद्र में रहा निर्दलीय गणित

सभापति चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने 30 पार्षदों को एकजुट रखने के साथ-साथ जरूरी अतिरिक्त समर्थन जुटाने की थी। नामांकन के दौरान सांसद बृजेंद्र सिंह ओला की मौजूदगी और वीरेन्द्र डारा का प्रस्तावक बनना इस रणनीति की अहम कड़ियां मानी गईं। मतदान का परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक तस्वीर यह रही कि कांग्रेस अपने मूल 30 के आंकड़े से पांच वोट आगे निकल गई। ऐसे में स्थानीय सियासी समीकरणों में इसे ओला की रणनीतिक कवायद की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। खास तौर पर इसलिए कि कांग्रेस ने राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद झुंझुनूं जैसे महत्वपूर्ण शहरी निकाय की सत्ता अपने पास बरकरार रखी है।

भांबू भी पीछे नहीं रहे, भाजपा 15 से पहुंची 25 पर

दूसरी ओर भाजपा का प्रदर्शन भी उसके मूल संख्या बल से काफी आगे रहा। परिषद चुनाव में भाजपा के केवल 15 पार्षद जीते थे, लेकिन सभापति चुनाव में उसके प्रत्याशी मनु धनखड़ को 25 वोट मिले। यानी भाजपा ने अपने मूल संख्या बल से 10 अतिरिक्त वोट जुटाए। इस लिहाज से विधायक राजेंद्र भांबू के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौती को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाजपा ने संख्या बल में कांग्रेस से काफी पीछे होने के बावजूद मुकाबले को एकतरफा नहीं होने दिया और अपने प्रत्याशी को 25 मतों तक पहुंचाया। लेकिन अंतिम बाजी कांग्रेस के पक्ष में रही। सियासी गणित में तस्वीर साफ है—भांबू भाजपा को 15 से 25 तक ले गए, लेकिन ओला कांग्रेस को 30 से 35 तक ले जाकर सभापति की कुर्सी तक पहुंचाने में सफल रहे।

वीरेन्द्र डारा की भूमिका ने बदला चुनाव का माहौल

वार्ड 9 से निर्दलीय जीते वीरेन्द्र डारा को लेकर चुनाव से पहले ही राजनीतिक चर्चा तेज थी। डारा ने 684 वोट लेकर वार्ड 9 से जीत दर्ज की थी और उन्हें पूर्व में नगर परिषद का उपसभापति भी बनाया गया था । वहीं सभापति पद के लिए अब्दुल्ला अगवान के नामांकन में वीरेन्द्र डारा का प्रस्तावक बनना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम रहा। बहुमत से सिर्फ एक वोट दूर खड़ी कांग्रेस के लिए यह समर्थन शुरूआती तौर पर जादुई आंकड़े के दरवाजे तक पहुंचने वाली पहली महत्वपूर्ण कड़ी बना। इसके बाद मतदान में कांग्रेस 35 तक पहुंची और सत्ता का रास्ता साफ हो गया।

अब्दुल्ला अगवान दूसरी बार पार्षद, पहली बार सभापति

वार्ड 41 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान लगातार दूसरी बार पार्षद बने हैं। 2026 के चुनाव में उन्हें 1,003 वोट मिले और उन्होंने निकटतम निर्दलीय प्रत्याशी को 734 मतों के अंतर से हराया। सभापति पद के नामांकन को लेकर आपत्ति भी सामने आई थी, लेकिन निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर सुनवाई के बाद उनका नामांकन बरकरार रहा। इसके बाद वे चुनाव मैदान में रहे और सोमवार को 35 मत हासिल कर सभापति निर्वाचित हुए।

मनु धनखड़ पहली बार पार्षद और पहली ही पारी में सभापति की दौड़

भाजपा ने वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनखड़ को सभापति पद का प्रत्याशी बनाया। पहली बार पार्षद बने धनखड़ को भाजपा ने सीधे सभापति पद की दौड़ में उतारा। उन्हें 25 वोट मिले।

प्रदेश में भाजपा सरकार, झुंझुनूं में कांग्रेस की शहरी सत्ता

झुंझुनूं नगर परिषद का यह परिणाम इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है कि राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद जिले की सबसे महत्वपूर्ण शहरी सत्ता कांग्रेस के हाथ में चली गई है। वार्ड चुनाव में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी और सभापति चुनाव में उसने अपने मूल संख्या बल से आगे जाकर 35 मत हासिल किए। इस चुनाव की पूरी राजनीतिक कहानी तीन आंकड़ों में सिमटती है—कांग्रेस 30 से 35, भाजपा 15 से 25 और निर्दलीय 15 से निर्णायक भूमिका तक। कांग्रेस के लिए सांसद बृजेंद्र सिंह ओला की रणनीति, निर्दलीय वीरेन्द्र डारा का समर्थन और फिर निर्दलीय खेमे में बने समीकरण निर्णायक रहे। वहीं भाजपा की ओर से विधायक राजेंद्र भांबू अपने दल के 15 पार्षदों के मूल आंकड़े को 25 तक ले जाने में सफल रहे। अंततः जिस कांग्रेस के सामने बहुमत के लिए केवल एक वोट की कमी थी, उसने पांच वोट की बढ़त के साथ बाजी पलट दी और झुंझुनूं नगर परिषद में एक बार फिर अपना बोर्ड कायम कर लिया।

अगवान का संदेश — 60 वार्डों में बिना भेदभाव होगा विकास

सभापति निर्वाचित होने के बाद अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान ने सभी 60 वार्डों में बिना भेदभाव विकास कराने की बात कही। उन्होंने सफाई व्यवस्था, शहर के विकास और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सभी पार्षदों के साथ मिलकर झुंझुनूं को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए काम किया जाएगा।

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