जनसहयोग से ही बनेगा अपराधमुक्त और सुरक्षित समाज – एसपी कावेन्द्र सिंह सागर

जिलेभर के सभी थानों में हुई सीएलजी बैठकें, कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, यातायात और नशामुक्ति पर हुआ मंथन

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झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
पुलिस और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रविवार को झुंझुनूं जिलेभर के सभी पुलिस थानों में कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (सीएलजी) की बैठकों का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित पुलिस थाना कोतवाली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर (आईपीएस) ने की। महानिरीक्षक पुलिस, जयपुर रेंज, जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित बैठक में शहर के गणमान्य नागरिकों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं सीएलजी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बैठक के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, साइबर अपराधों की रोकथाम, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में उपस्थित नागरिकों ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखा। एसपी कावेन्द्र सिंह सागर ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उनके त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं समन्वय ही सुरक्षित समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि सीएलजी सदस्य पुलिस और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं तथा उनके सहयोग से अपराधों की रोकथाम और सामाजिक सौहार्द को और अधिक मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें तथा विशेष रूप से साइबर अपराधों के प्रति स्वयं जागरूक रहें और दूसरों को भी जागरूक करें, ताकि ऑनलाइन ठगी जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।इसी क्रम में जिले के सभी पुलिस थानों में संबंधित वृत्त अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों की अध्यक्षता में भी सीएलजी बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, जनसहयोग बढ़ाने तथा कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। पुलिस विभाग का मानना है कि नियमित संवाद, पारदर्शिता और जनभागीदारी से न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, बल्कि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।

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