सात वर्षीय बच्ची की भोजन नली में अटका था सिक्का, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूझबूझ और आधुनिक तकनीक से टला बड़ा खतरा
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झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
जिले के सबसे बड़े बीडीके जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सात वर्षीय बच्ची के गले (भोजन नली) में फंसे सिक्के को बिना किसी बाहरी चीरे के एंडोस्कोपी तकनीक से सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचा ली। विशेषज्ञ चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई और समन्वित टीमवर्क के चलते बच्ची को संभावित गंभीर जटिलताओं से सुरक्षित बचाया जा सका। पीएमओ एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र भाम्बू ने बताया कि चिड़ावा क्षेत्र के गूगोजी की ढाणी निवासी सात वर्षीय बच्ची की भोजन नली के ऊपरी हिस्से में सिक्का फंस गया था। परिजन उसे तत्काल बीडीके जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच में सिक्का भोजन नली में फंसा मिला, जिसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बिना समय गंवाए एंडोस्कोपिक प्रक्रिया करने का निर्णय लिया।ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा कृष्णिया ने प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र पायल एवं डॉ. दुष्यंत बसेरा के मार्गदर्शन में विशेष एंडोस्कोपिक उपकरणों की सहायता से बिना किसी बाहरी चीरे के सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया सफल रही और उपचार के बाद बच्ची की स्थिति पूरी तरह सामान्य एवं स्थिर है। समय पर उपचार मिलने से भोजन नली में संक्रमण, रक्तस्राव तथा अन्य गंभीर जटिलताओं की आशंका भी टल गई। डॉ. प्रतिभा कृष्णिया ने बताया कि बच्चों द्वारा सिक्के, बटन बैटरी अथवा अन्य छोटी वस्तुएं निगलने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। ऐसे मामलों में अभिभावकों को घबराने के बजाय किसी भी प्रकार के घरेलू उपाय या जबरन कुछ खिलाने-पिलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। बच्चे को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाकर विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार कराना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है। इस जटिल एंडोस्कोपिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने में ईएनटी विभाग, एनेस्थीसिया टीम तथा ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. प्रतिभा कृष्णिया ने बताया कि बीडीके जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेन्द्र भाम्बू के मार्गदर्शन एवं सतत सहयोग से चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों के उत्कृष्ट समन्वय, तत्परता, समर्पण और टीमवर्क के कारण यह चुनौतीपूर्ण उपचार सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चों के गले या भोजन नली में सिक्का, बटन बैटरी या कोई अन्य वस्तु फंस जाए तो एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने और एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीक से उपचार मिलने पर गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। बीडीके जिला अस्पताल की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जिला स्तर पर भी विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक सुविधाओं के दम पर जटिल मामलों का प्रभावी उपचार संभव है।
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