सीमावर्ती जिलों में मस्जिद, मदरसे और दरगाहों को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया हटाने के आरोप; संविधान, कानून और सामाजिक सौहार्द की रक्षा का उठाया मुद्दा
जयपुर । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों तथा अन्य धार्मिक स्थलों को कथित रूप से बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए हटाए जाने की घटनाओं को लेकर शनिवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जयपुर में शिष्टाचार भेंट कर गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रतिनिधिमंडल ने इन घटनाओं को संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. खानू खान बुधवाली चेयरमैन , राजस्थान वक्फ बोर्ड़ , बचाया खान (बाड़मेर), अब्दुल रहीम (बाड़मेर), लियाकत अली चुगनी तथा रफीक खान (झोटवाड़ा) शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों के संबंध में हो रही कार्रवाइयों को लेकर लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल के संबंध में की जाने वाली कार्रवाई पूरी तरह संविधान और कानून के अनुरूप होनी चाहिए तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य है। प्रतिनिधिमंडल ने अशोक गहलोत से आग्रह किया कि वे इस गंभीर विषय पर आवश्यक हस्तक्षेप करते हुए संबंधित स्तर पर उचित कदम उठाने की पहल करें, ताकि संविधान की गरिमा, कानून का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना अक्षुण्ण रह सके। साथ ही सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और न्यायपूर्ण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, आस्था और उपासना पद्धति के अनुसार जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक स्थल के संबंध में होने वाली कार्रवाई पूर्णतः पारदर्शी, न्यायसंगत और विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। संविधान और कानून की अवहेलना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को आहत करती है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति भी उत्पन्न कर सकती है। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान वक्फ बोर्ड संविधान और कानून के दायरे में रहकर वक्फ संपत्तियों, मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों एवं अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण तथा उनसे जुड़े मामलों के न्यायोचित समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकतंत्र में संविधान सर्वोच्च है और सभी संस्थाओं एवं प्रशासनिक इकाइयों का दायित्व है कि वे कानून के शासन और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर न्यायपूर्ण एवं विधिसम्मत समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।










