“खुद मंजिल तक पहुंचे और फिर दूसरों के लिए रास्ते बनाने निकल पड़े”
सीकर । राहुल टांक
राजस्थान के जयपुर जिले के सांभर लेक क्षेत्र से निकलकर देशभर में खटीक समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा बने आयकर अधिकारी एवं समाजसेवी रमेश सांभरिया की जीवन यात्रा संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और समाज के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी उस व्यक्ति के कदम नहीं रोक सकतीं, जिसके इरादे मजबूत हों और लक्ष्य स्पष्ट हो।आज वे केवल भारत सरकार के आयकर विभाग में अधिकारी भर नहीं हैं, बल्कि हजारों युवाओं के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और समाजसेवा के पर्याय बन चुके हैं।

साधारण परिवार से शुरू हुआ असाधारण सफर
रमेश सांभरिया का जन्म एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने अभावों को बेहद करीब से देखा। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे बिना संघर्ष के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। इसी कारण उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ निजी क्षेत्र में नौकरी भी की, ताकि अपनी शिक्षा का खर्च स्वयं उठा सकें और परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। दिन में नौकरी और रात में पढ़ाई उनके जीवन का हिस्सा बन गई। संसाधनों की कमी और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

प्रशासनिक सेवा का सपना और निरंतर संघर्ष
युवा अवस्था में उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने UPSC, RPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, डिफेंस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी और कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उन्होंने RAS मुख्य परीक्षा तक का सफर तय किया, वहीं PSI, SSC CGL, AAI, बैंकिंग तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।हालांकि उनका RAS अधिकारी बनने का सपना अंतिम रूप से पूरा नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने इसे अपनी असफलता नहीं बनने दिया। उन्होंने हर चुनौती को नए अवसर में बदलने की क्षमता दिखाई।

आयकर विभाग में अधिकारी बनने तक का सफर
लगातार प्रयासों और कठिन संघर्षों के बाद उनका चयन सरकारी सेवा में हुआ। उन्होंने DSSSB के माध्यम से सफलता प्राप्त की और बाद में आयकर विभाग में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं।सरकारी अधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने अपनी जड़ों और समाज को कभी नहीं भुलाया। यही सोच उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है।

जब सफलता का अर्थ बना – समाज को लौटाना
अक्सर लोग सफलता प्राप्त करने के बाद अपने व्यक्तिगत जीवन तक सीमित हो जाते हैं, लेकिन रमेश सांभरिया ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने यह महसूस किया कि जिस समाज ने उन्हें पहचान दी है, उसके प्रति भी उनका दायित्व है। इसी सोच से उन्होंने “Pay Back To Society” मिशन की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य समाज के शिक्षित, सफल और सक्षम लोगों को एक मंच पर लाकर युवाओं, विद्यार्थियों और जरूरतमंद परिवारों के लिए कार्य करना था।

तीन वर्षों में तैयार किया राष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क
रमेश सांभरिया ने खटीक समाज के IAS, IPS, IRS, RAS, RPS, डॉक्टरों, प्रोफेसरों, बैंक अधिकारियों, उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों, व्यवसायियों और समाजसेवियों को जोड़ने का अभियान शुरू किया।धीरे-धीरे यह प्रयास एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेने लगा। देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत समाज के अधिकारी और प्रोफेशनल इस अभियान से जुड़ते गए और समाजहित में अपनी भूमिका निभाने लगे।

शिक्षा को बनाया परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम
रमेश सांभरिया का मानना है कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास शिक्षा से ही संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने समाज पुस्तकालयों की स्थापना का कार्य शुरू किया।सांभर लेक और मुंबई में स्थापित पुस्तकालयों ने अनेक विद्यार्थियों को अध्ययन की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई। इन पुस्तकालयों का उद्देश्य केवल किताबें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास विकसित करना भी रहा।

रोजगार और करियर मार्गदर्शन के लिए अभिनव पहल
उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार मेले, करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम तथा RAS मॉक इंटरव्यू जैसे नवाचारपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए।इन कार्यक्रमों में वरिष्ठ IAS, IPS, RAS और अन्य अधिकारियों ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि अनेक विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सही दिशा और प्रेरणा मिली।

सामाजिक आयोजनों में पेश किया नया मॉडल
रमेश सांभरिया की कार्यशैली पारंपरिक सामाजिक आयोजनों से अलग रही। उन्होंने समाज में एक नया और प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया—
- बिना मंच
- बिना साफा
- बिना माला
- बिना मुख्य अतिथि संस्कृति
- बिना अनावश्यक भाषणबाजी
उन्होंने पारदर्शिता, समानता और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया। राउंड टेबल बैठक व्यवस्था, सीधे वेंडर्स को भुगतान तथा बिना किसी फंड या संगठनात्मक राजनीति के कार्यक्रम आयोजित करना उनकी विशेष पहचान बन गया।

जरूरतमंदों के लिए हमेशा उपलब्ध
शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र के अलावा वे स्वास्थ्य सहायता, रक्तदान, मेडिकल सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन तथा जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए भी लगातार सक्रिय रहते हैं।समय पर सहायता पहुंचाकर उन्होंने अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। यही कारण है कि समाज के लोग उन्हें केवल अधिकारी नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद साथी और मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं।

नवाचार और सेवा कार्यों के लिए मिला सम्मान
समाजहित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक मंचों पर सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 में सांभर लेक प्रशासन द्वारा उन्हें “उत्कृष्ट योगदान एवं नवाचार सम्मान” प्रदान किया गया, जो उनके सामाजिक कार्यों की महत्वपूर्ण आधिकारिक पहचान है।
हजारों युवाओं की उम्मीद बन चुके हैं रमेश सांभरिया
आज रमेश सांभरिया केवल एक आयकर अधिकारी नहीं हैं। वे उन हजारों युवाओं की प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता केवल स्वयं ऊंचाइयों तक पहुंचने में नहीं, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने में निहित है।
उनकी प्रेरक सोच
“कछुए की तरह धीरे-धीरे, लेकिन निरंतर आगे बढ़ो। गति भले कम हो, लेकिन दिशा सही होनी चाहिए।”
निष्कर्ष
रमेश सांभरिया की यात्रा संघर्ष से सफलता और सफलता से समाजसेवा तक की प्रेरणादायी यात्रा है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि ईमानदार नीयत, सकारात्मक सोच और सेवा भावना के साथ किया गया कार्य पूरे समाज में परिवर्तन की नई शुरुआत कर सकता है। आज उनका नाम केवल एक सरकारी अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे समाजसेवी के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत संघर्षों को समाज की सामूहिक शक्ति में बदलने का प्रयास किया। वास्तव में, रमेश सांभरिया की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और “Pay Back To Society” की भावना का जीवंत उदाहरण भी। रमेश सांभरिया, खटीक समाज, आयकर अधिकारी, Pay Back To Society, समाजसेवा, प्रेरणादायी कहानी, शिक्षा अभियान, करियर मार्गदर्शन, सांभर लेक, युवा प्रेरणा,













