स्वर्ण कला के संरक्षण और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा दिलाने पर दिया जोर, समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान





चूरू। मेढ़ क्षेत्रीय स्वर्णकार भवन में रविवार को स्वर्णकार समाज की ओर से अजमीढ़ जयंती धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के बुजुर्ग पूरनमल जम्मूवाल, जोधराज तोषावड़ और सत्यनारायण ठाकरान मंचासीन रहे। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने अजमीढ़ जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। विजय सनखत ने गणेश वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
स्वर्ण कला की परंपरा के संरक्षण पर चर्चा
कार्यक्रम में पूरनमल जम्मूवाल, लेखराज कुकरा और सीताराम बराड़िया ने अजमीढ़ जी के इतिहास, स्वर्ण कला की समृद्ध परंपरा और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि समाज की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए किया प्रेरित
वक्ताओं ने समाज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से युवा नई संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही समाज की एकता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
समाज के गणमान्यजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जमनाधर कड़ेल, जगदीश कुलथिया, राजकुमार सनखत, भानूप्रकाश तोषावड़, कमल कुमार तोषावड़, बजरंग लाल सनखत, विजय ठाकरान, सुशील कुमार बराड़िया, अशोक नारनौली, आनंद ठाकरान, जगदीश नारनौली, दुलीचंद कुलथिया और विनोद सनखत सहित स्वर्णकार समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।समारोह में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामाजिक एकजुटता, शिक्षा के महत्व तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।














