बिजली उपभोक्ता को 72 घंटे में राहत , घरेलू कनेक्शन बहाल कराने के साथ संशोधित बिल भी निर्धारित
झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
राष्ट्रीय लोक अदालत में उपभोक्ता विवादों के त्वरित निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए झुंझुनूं में 52 उपभोक्ता प्रकरणों का निस्तारण कराया गया। शनिवार को आयोजित तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अजय गोदारा एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील की बेंच ने लोक अदालत की भावना के अनुरूप प्रकरणों का निस्तारण कर पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत दिलाई।
लोक अदालत में आपसी सहमति और त्वरित समाधान के माध्यम से उपभोक्ता विवादों को सुलझाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य परिवादियों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाकर उनके मामलों का समयबद्ध निस्तारण करना रहा। लोक अदालत में एक उपभोक्ता प्रकरण का त्वरित समाधान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। प्रकरण दर्ज होने के महज 72 घंटे के भीतर ही संबंधित विद्युत उपभोक्ता का घरेलू बिजली कनेक्शन पुनः स्थापित करवाया गया।
इसके साथ ही विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप संशोधित बिजली बिल की राशि भी निर्धारित करवाई गई। त्वरित कार्रवाई से उपभोक्ता को राहत मिली और यह सामने आया कि समय पर सुनवाई एवं प्रभावी समन्वय से उपभोक्ता विवादों का शीघ्र समाधान संभव है। लोक अदालत के दौरान अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के विधि अधिकारी डॉ. प्रज्ञ कुल्हार, अधिशासी एवं नोडल अधिकारी प्रदीप कुमार भाम्बू, सहायक अभियंता अनिल कालेर, हरिराम जमालपुरिया, अरविन्द झाझड़िया, राजस्व अधिकारी सुंदरलाल, इकबाल अली, सतवीर एवं राजेश जांगिड़ उपस्थित रहे।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ओर से रीडर महावीर सिंह मीणा, वरिष्ठ सहायक चंदन कुमार सैनी, एजाज नबी, आदिल फारूकी, अमित शर्मा, अविनाश सिंह शेखावत एवं प्रमोद मीणा मौजूद रहे। इसी प्रकार जिला अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष रतन मोरवाल, सचिव विकास महमिया, वरिष्ठ अधिवक्ता भगवान सिंह शेखावत, गजेंद्र सिंह राठौड़, कमलेश झाझड़िया, विजेन्द्र बारहट, फूलचंद सैनी, लाल बहादुर जैन तथा अधिवक्ता मुकेश कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में परिवादी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों का निस्तारण होने से परिवादियों को न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय और अनावश्यक परेशानी से राहत मिली। लोक अदालत का मंच आपसी सहमति से विवादों के समाधान तथा मुकदमेबाजी से स्थायी छुटकारा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।












