भाजपा की ‘एकजुटता’ पर सवाल! निकाय चुनाव से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखी गुटबाजी की तस्वीर!, ‘सशक्त शहर, समृद्ध राजस्थान’ का संकल्प पत्र तो सामने आया, लेकिन जिला मुख्यालय की बैठक में स्थानीय विधायक समेत कई प्रमुख चेहरे नदारद; चुनिंदा नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी चर्चाएं
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी भले ही सभी 19 निकायों में बहुमत से बोर्ड बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन चुनावी रण में उतरने से पहले जिला मुख्यालय पर शनिवार को आयोजित पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने संगठन के भीतर चल रहे कथित असंतोष और आपसी समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंच से भाजपा की मजबूती और एकजुटता का संदेश दिया गया, लेकिन कार्यक्रम में नजर आए राजनीतिक समीकरणों ने इस दावे के सामने अलग तस्वीर पेश कर दी। शहर मंडल अध्यक्ष कमलकांत शर्मा की अध्यक्षता में मुनि अतिथि भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी मुख्य वक्ता और पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश खाजपुरिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। जिला मीडिया प्रभारी ललित कुमार जोशी ने निकाय चुनाव 2026 के लिए जारी नगरीय विकास संकल्प पत्र की जानकारी दी।
मंच पर विकास का एजेंडा, लेकिन सियासी गलियारों में संगठन की तस्वीर चर्चा में
भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी ने कहा कि “निकाय मजबूत होंगे तभी शहर मजबूत होगा।” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से जारी ‘सशक्त शहर, समृद्ध राजस्थान’ के विजन के तहत अगले पांच वर्षों में शहरी विकास को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। संकल्प पत्र में विभिन्न आय वर्गों के लिए एक लाख आवासीय भूखंड, सात लाख से अधिक घरों में रसोई गैस कनेक्शन, महिलाओं के लिए 2000 पिंक टॉयलेट, 15 लाख स्ट्रीट लाइट, वरिष्ठ नागरिक सेवा केंद्र, स्ट्रीट वेंडर्स व ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए बीमा कवर, वेंडिंग जोन, पार्किंग स्थल, फूड कोर्ट, कचरा मुक्त शहर, कचरा वाहनों की ट्रैकिंग, आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, निराश्रित पशुओं के लिए शेल्टर होम, सीसीटीवी कैमरे और प्रमुख मार्गों के विकास जैसे वादे गिनाए गए। लेकिन विकास के इन बड़े दावों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस का राजनीतिक दृश्य खुद भाजपा के लिए ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।
स्थानीय विधायक की गैरमौजूदगी ने खींचा सियासी ध्यान
जिला मुख्यालय आयोजित हुई एक महत्वपूर्ण चुनावी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय विधायक राजेंद्र भाम्बू की मौजूदगी नहीं होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का कारण बना। इतना ही नहीं, जिले के अन्य विधायकों, पूर्व विधायकों और संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ चेहरों की गैरमौजूदगी भी नजर आई। निकाय चुनाव जैसे महत्वपूर्ण चुनाव से ठीक पहले आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के चुनिंदा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने भाजपा के भीतर आपसी तालमेल और समन्वय को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सवाल यह है कि जब भाजपा नेतृत्व सभी 19 निकायों में बहुमत का दावा कर रहा है, तब चुनावी रणनीति और संगठन की एकजुटता का संदेश देने वाली प्रेस वार्ता में पार्टी के कई प्रमुख चेहरों की दूरी आखिर क्या संकेत देती है?
19 में 19 बोर्ड का दावा, लेकिन पहले घर संभालने की चुनौती?
भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी ने दावा किया कि आगामी निकाय चुनाव में सभी 19 निकायों में भाजपा बहुमत से बोर्ड बनाएगी। दावा बड़ा है और चुनाव भी भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मगर राजनीतिक तौर पर सबसे बड़ी चुनौती केवल विपक्ष से मुकाबला करना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर हर स्तर पर बेहतर तालमेल बनाए रखना भी होगी। चुनाव मैदान में टिकट वितरण के बाद से ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक खींचतान और दावेदारी की चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में पार्टी के बड़े नेताओं का एक मंच पर नजर नहीं आना निश्चित तौर पर भाजपा के लिए असहज राजनीतिक संदेश पैदा करता है। हालांकि केवल किसी नेता की कार्यक्रम में अनुपस्थिति को संगठनात्मक मतभेद का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन चुनावी माहौल में लगातार ऐसी गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा देती है।
संकल्प पत्र के सहारे वोटरों को साधने की कोशिश
भाजपा ने प्रेस वार्ता के जरिए साफ करने का प्रयास किया कि निकाय चुनाव उसके लिए केवल बोर्ड गठन का चुनाव नहीं, बल्कि शहरों के विकास का रोडमैप लागू करने का अवसर है। पार्टी ने शहरी मतदाताओं के सामने सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, पार्किंग और महिला सुविधाओं से जुड़े वादों का विस्तृत खाका रखा। लेकिन चुनावी राजनीति में संकल्प पत्र जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण संगठन का जमीन पर एकजुट दिखाई देना भी है। यही वह मोर्चा है जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर भाजपा के लिए असहज सवाल छोड़ गई।
भाजपा के दावे बनाम दिखाई देती तस्वीर—एक तरफ जिलाध्यक्ष का दावा
‘सभी 19 निकायों में भाजपा का बोर्ड’, दूसरी तरफ जिला मुख्यालय की चुनावी प्रेस वार्ता में पार्टी के कई प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में भाजपा के बड़े नेता एक मंच पर कितनी मजबूती से नजर आते हैं और चुनावी मैदान में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा किस तरह एकजुट होकर प्रत्याशियों के पक्ष में उतरता है। क्योंकि निकाय चुनाव में मुकाबला केवल कांग्रेस या अन्य दलों से नहीं है—भाजपा के लिए असली परीक्षा अपने संगठन को एकजुट रखकर बूथ तक चुनावी संदेश पहुंचाने की भी है।













