Advertisement
Home राजस्थान चूरू गोगा जी की भक्ति में झूमे श्रद्धालु, हाथों में सांप और गोह...

गोगा जी की भक्ति में झूमे श्रद्धालु, हाथों में सांप और गोह लेकर पहुंचे मेड़ी

चूरू में आस्था, लोक परंपरा और सामाजिक समरसता का अनूठा नजारा; करीब 30 गोगामेड़ियों से निशान लेकर प्राचीन गोगामेड़ी पहुंचे श्रद्धालु

चूरू। लोक देवता जाहरवीर गोगा जी का मेला शनिवार को चूरू में आस्था और लोक परंपराओं के रंग में नजर आया। शहर की करीब 30 गोगामेड़ियों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। अलग-अलग स्थानों से श्रद्धालु निशान लेकर ढोल-झिंझर की धुन के साथ शहर की प्राचीन गोगामेड़ी पहुंचे।मेले में महिलाएं, पुरुष और युवा गोगा जी की भक्ति में सराबोर नजर आए। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच मेड़ी पहुंचकर धोक लगाई और परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश तथा देश-प्रदेश के कल्याण की कामना की।

हाथों में सांप और गोह लेकर पहुंचे श्रद्धालु

मेले के दौरान सबसे अलग नजारा उस समय देखने को मिला, जब कुछ श्रद्धालु सांप और गोह लेकर गोगा जी की मेड़ी की ओर जाते दिखाई दिए। कोई श्रद्धालु हाथों में सांप थामे नजर आया तो कोई गोह लेकर ढोल-झिंझर की धुन पर भक्ति में झूमता दिखाई दिया।इस पारंपरिक दृश्य ने मेले में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चे और महिलाएं भी उत्सुकता के साथ इस परंपरा को देखते नजर आए। आयोजकों और श्रद्धालुओं के अनुसार, गोगा जी को नागों से जुड़ी लोक आस्था के कारण मेले में सांप और गोह लेकर आने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

आस्था के साथ सामाजिक भाईचारे का संदेश

जाहरवीर गोगा जी को राजस्थान की लोक आस्था में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक भाईचारे के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। मुस्लिम समाज के लोग भी उन्हें जाहर पीर के नाम से श्रद्धा से स्मरण करते हैं।यही कारण है कि चूरू का गोगा जी मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का अवसर भी बनता है। मेले में श्रद्धालु ढोल-झिंझर की धुन पर नाचते-गाते और गोगा जी के जयकारे लगाते हुए मेड़ी तक पहुंचे।

जनप्रतिनिधियों ने भी मेले में की शिरकत

भाजपा नेताओं ने विधायक हरलाल सहारण के साथ मेले में पहुंचकर गोगा जी के दर्शन किए और श्रद्धालुओं से राम-राम की। जिला प्रशासन की ओर से मेले के अवसर पर स्थानीय स्तर पर अवकाश रखा गया। वहीं पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं के लिए इंतजाम किए।

ददरेवा से जुड़ी है गोगा जी की लोक आस्था

लोक मान्यता के अनुसार जाहरवीर गोगा जी का जन्म विक्रम संवत 1003 में चूरू जिले के ददरेवा गांव में हुआ था। ददरेवा आज भी गोगा जी से जुड़ा प्रमुख आस्था स्थल माना जाता है।चूरू में हर वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला सदियों पुरानी लोक परंपराओं और आस्था को आगे बढ़ाता है। आधुनिक दौर में भी मेले में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ गोगा जी के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाती है।

 

Advertisement