यूसीसी पर पुनर्विचार की मांग: जमीयत उलेमाए हिंद ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

‘धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत कानून और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की उठाई मांग’

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झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
समान नागरिक संहिता ( यूसीसी ) बिल के विरोध में बुधवार को जमीयत उलेमाए हिंद जिला झुंझुनूं के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति एवं केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित बिल पर पुनर्विचार की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश की विविधता, धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का संरक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। ज्ञापन सौंपने के दौरान शहर काज़ी , मौलाना शौकत क़ासमी, मौलाना मोहम्मद एवं मौलाना शकरुद्दीन ने कहा कि प्रस्तावित यूसीसी बिल इस्लामी शरीयत के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, रीति-रिवाज और व्यक्तिगत कानूनों के अनुसार जीवन जीने तथा धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी कानून के निर्माण में देश की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विविधता का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी बहुलतावादी परंपरा और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सौहार्द में निहित है। इसलिए सरकार को सभी पक्षों से व्यापक संवाद कर ऐसा निर्णय लेना चाहिए, जिससे संविधान की मूल भावना और सभी नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से यूसीसी बिल पर पुनर्विचार करने, विभिन्न धार्मिक समुदायों की भावनाओं का सम्मान करने तथा संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस अवसर पर जमीयत उलेमाए हिंद जिला झुंझुनूं के अध्यक्ष हाफिज वसीम धनूरी, जमीयत उलेमाए राजस्थान के खाजिन मौलाना मोहम्मद, शहर काज़ी मौलाना शौकत क़ासमी, मुस्लिम न्याय मंच के अध्यक्ष इमरान बड़गुजर, मुस्लिम वेलफेयर फ्रंट के अध्यक्ष इंजीनियर इब्राहीम खान, मौलाना शहाबुद्दीन, जमीयत उलेमाए झुंझुनूं के मीडिया प्रभारी हाफिज अब्दुल वाहिद, मौलाना शकरूद्दीन, मौलाना यूनुस, मास्टर यूनुस सहित बड़ी संख्या में उलेमा, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।