प्राकृतिक खेती बनेगी समृद्ध किसान और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला: खरीफ पूर्व किसान गोष्ठी में विशेषज्ञों ने दिया संदेश

जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती एवं खरीफ पूर्व किसान गोष्ठी आयोजित, उत्कृष्ट कृषकों का हुआ सम्मान

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
कृषि में बढ़ती लागत, घटती भूमि उर्वरता और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती को भविष्य का सशक्त विकल्प बताते हुए शनिवार को जिला परिषद सभागार में आत्मा योजनान्तर्गत जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती एवं खरीफ पूर्व किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की नवीन तकनीकों, वैज्ञानिक उपायों तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों का आह्वान किया कि वे रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गोष्ठी में निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी, विधायक राजेन्द्र भाम्बू, पूर्व सांसद नरेन्द्र खीचड़, हरिराम रणवा, रतन तंवर, विशंभर पूनियां सहित कई जनप्रतिनिधियों ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित योजनाओं एवं सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए किसानों को इनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. राजेन्द्र सिंह लाम्बा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए जिले में संचालित कृषि कार्यक्रमों तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परसुराम धानका ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प दिलाते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।

विशेषज्ञों ने बताए प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक उपाय

कृषि विज्ञान केन्द्र आबूसर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दयानन्द ने किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, वेस्ट-डी कम्पोजर, हरी खाद, फसल चक्र, बीज उपचार तथा मित्र कीटों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। वहीं सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. सहदेव सिंह ने गर्मी में गहरी जुताई, कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान आत्मा योजनान्तर्गत जिला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को सम्मानित किया गया। विजेन्द्र सिंह सांगासी को जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तथा सुरेन्द्र सिंह पबाना को पशुपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि (आत्मा) डॉ. संध्या कुमारी ढाका, सहायक निदेशक कृषि रोहिताश ढाका, कृषि अधिकारी सुभाषचन्द्र सीगड़, उप परियोजना निदेशक आत्मा प्रमोद कुमार, कृषि अनुसंधान अधिकारी सुलोचना, माया चौधरी, मनमोहन सिंह, मुकेश कुमार, सहायक कृषि अधिकारी विजय सिंह, ओमप्रकाश भड़िया, तपेश कुमार, रीतेश कुमार, विजय ढाका सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।