मतदाता सूची में कथित फर्जीवाड़े, पुराने क्लबों को बाहर कर रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप; जांच पूरी होने तक चुनाव स्थगित
झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
झुंझुनूं जिला फुटबॉल संघ (डीएफए) के प्रस्तावित चुनावों को लेकर उठे विवाद ने शनिवार को बड़ा मोड़ ले लिया। जिलेभर के फुटबॉल खिलाड़ियों, रेफरियों, क्लब संचालकों और खेल प्रेमियों ने ‘फुटबॉल बचाओ संघर्ष समिति, झुंझुनूं’ के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन कर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। खिलाड़ियों के आक्रोश और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद प्रस्तावित चुनावों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर और जिला खेल अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए वर्तमान पदाधिकारियों पर नियमों की अनदेखी, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं बरतने तथा चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए। खिलाड़ियों का कहना था कि फुटबॉल संघ में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर मनमाने ढंग से चुनाव करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
मतदाता सूची पर उठे सवाल, पुराने क्लबों को बाहर करने का आरोप
संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि जिला फुटबॉल संघ द्वारा 24 मई 2026 को जारी चुनाव कार्यक्रम और मतदाता सूची के सामने आते ही कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं। आरोप है कि जिले के दो पुराने और सक्रिय क्लब—आरजे क्लब ( कैलाश शर्मा ) तथा डेलिशा फुटबॉल क्लब ( मनोज कुमार सैनी ) को बिना किसी नोटिस, कारण बताओ सूचना अथवा सदस्यता समाप्ति आदेश के मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसके विपरीत कुछ नए क्लबों को सूची में शामिल किया गया, जिनका संबंध वर्तमान सचिव के परिवार और रिश्तेदारों से है। खिलाड़ियों ने इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और संघ पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश बताया।
उप-रजिस्ट्रार के आदेश के बावजूद चुनाव प्रक्रिया जारी रखने का आरोप
मामले की शिकायत उप-रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) कार्यालय में दर्ज होने के बाद विभाग ने 10 जून 2026 को जिला खेल अधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। आदेश में राजस्थान खेल (पंजीकरण, मान्यता एवं विनियमन) अधिनियम, 2005 के तहत शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जांच लंबित रहने के दौरान ही वर्तमान सचिव ने चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया और शिक्षा विभाग के एक ग्रेड थर्ड शारीरिक शिक्षक को कथित रूप से निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर 14 जून को चुनाव करवाने की तैयारी शुरू कर दी।विवाद को लेकर बड़ी संख्या में खिलाड़ी, रेफरी, छात्र और क्लब प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे और “फुटबॉल बचाओ” के नारों के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और मतदाता सूची की विसंगतियों का समाधान नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए। खिलाड़ियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो जिलेभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
तहसीलदार और सीआई ने संभाली स्थिति
प्रदर्शन की सूचना पर तहसीलदार महेंद्र मूंड तथा कोतवाली थाना प्रभारी श्रवण कुमार मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। प्रशासनिक अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। तहसीलदार महेंद्र मूंड ने कहा कि मामले में विभिन्न पक्षों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं तथा विवाद की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को रुकवा दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
संघर्ष समिति की प्रमुख मांगो में
जांच पूरी होने तक जिला फुटबॉल संघ के सभी चुनावी कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित किए जाएं। उप-रजिस्ट्रार के आदेशों की अवहेलना करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाए। फुटबॉल संघ में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएं ये मांगे शामिल है । झुंझुनूं के खेल जगत में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर व्यापक चर्चा है। खिलाड़ियों का कहना है कि फुटबॉल संघ का संचालन पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए ताकि जिले में फुटबॉल का विकास प्रभावित न हो। अब सभी की निगाहें जिला खेल अधिकारी की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।













