“नीट की अनिश्चितता ने छीनी एक और ज़िंदगी”

सीकर में नीट अभ्यर्थी की मौत ने खड़े किए सवाल, झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे के 22 वर्षीय प्रदीप माहीच की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया  

गुढ़ागौड़जी I झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
प्रतियोगी परीक्षाओं की अव्यवस्था, लगातार बदलते फैसले और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव ने एक और युवा की जान ले ली। सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे के बाड्या नला निवासी 22 वर्षीय प्रदीप माहीच की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिवार का आरोप है कि परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद वह गहरे तनाव में चला गया था। गरीब परिवार से आने वाला प्रदीप तीन बहनों का इकलौता भाई था। वह पिछले तीन-चार वर्षों से सीकर में रहकर निजी कोचिंग संस्थान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परिवार ने सपनों की खातिर आर्थिक तंगी झेली, लेकिन बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। इस बार घरवालों को उम्मीद थी कि प्रदीप डॉक्टर बनकर परिवार की तकदीर बदल देगा। परिजनों के अनुसार, 3 मई को हुई नीट परीक्षा के बाद प्रदीप बेहद खुश था। उसने खुद कहा था कि उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है और करीब 650 अंक आने की संभावना है। परिवार और गांव में चयन को लेकर उत्साह था। लेकिन परीक्षा को लेकर फैली अनिश्चितता और रद्द होने की चर्चाओं ने उसकी मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों से वह तनाव में था और कम बोल रहा था। शुक्रवार सुबह भी उसने अपने पिता राजेश से फोन पर बात की थी। परिवार रोज़ की तरह उसके लिए दूध और छाछ भेजने की तैयारी कर रहा था। कुछ देर बाद उसके निधन की सूचना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है जहां लाखों विद्यार्थी वर्षों तक कोचिंग, तनाव, प्रतियोगिता और अनिश्चितता के बोझ तले जीते हैं। एक परीक्षा के इर्द-गिर्द युवाओं का भविष्य इस तरह बंध चुका है कि परिणाम या विवाद की हर खबर सीधे उनकी मानसिक स्थिति पर असर डालती है। सीकर, कोटा और देश के कई कोचिंग शहर अब सिर्फ शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि दबाव, अकेलेपन और उम्मीदों के भारी बोझ से जूझते युवाओं की कहानी बनते जा रहे हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह संकेत दे रहे हैं कि केवल परीक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर और संवेदनशील नीति की जरूरत है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गांव में शोक का माहौल है और हर आंख में एक ही सवाल है — क्या मेहनत करने वाले विद्यार्थियों की जिंदगी अब व्यवस्था की अव्यवस्था के भरोसे छोड़ दी गई है?