छोटे से गांव से ओलंपिक मेडल तक का सफर देता है प्रेरणा

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महान पैरा ओलंपियन देवेंद्र झाझड़िया को भारतीय जीवन बीमा निगम ने 50 लाख देकर किया सम्मानित

चूरू। भारतीय जीवन बीमा निगम की ओर से शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित स्थित चूरू शाखा कार्यालय में भारत के महान खिलाड़ी, टोक्यो पैरा ओलंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट, राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्डी देवेंद्र झाझड़िया का सम्मान किया गया। निगम के विपणन प्रबंधक एमएल सोनी सहित अधिकारियों ने देवेंद्र झाझड़िया को बीमा निगम की ओर से 50 लाख का चैक, शॉल, श्रीफल देकर सम्मानित दिया।इस मौके पर सोनी ने कहा कि झाझड़िया ने अपनी उपलब्धियों से हम सभी को गौरवान्वित किया है। छोटे से गांव में पैदा होकर, संसाधन विहीन परिवेश से निकलकर ओलंपिक गोल्ड मेडल तक का सफर अपने आप में एक मिसाल है। देश के लिए ओलंपिक पदकों की हैट्रिक बनाने वाला एकमात्र खिलाड़ी होना बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देवेंद्र का जीवन और उनकी उपलब्धियां देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।सम्मान से अभिभूत देवेंद्र झाझड़िया ने कहा कि आमतौर पर इस तरह के सम्मान समारोह महानगरों में आयोजित होते हैं और देश के कोने कोने में उन्हें सम्मानित होने का अवसर मिला है लेकिन आज अपने घर में सम्मानित करने की जो पहल भारतीय जीवन बीमा निगम ने की है उससे बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि बीमा के क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय नाम है और भारतीय जीवन बीमा निगम ने बीमा को अंतिम और तक के व्यक्ति तक पहुंचाया है। देश के विकास में भारतीय जीवन बीमा निगम का उल्लेखनीय योगदान है। झाझड़िया ने कहा कि उनका फोकस हमेशा खेल पर रहा है। खेल के अलावा उन्होंने दूसरी चीजों पर कभी ध्यान नहीं दिया। खेलना उन्हें बहुत अच्छा लगता है और देश के लिए खेलना और भी अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि 20 साल से देश के लिए खेल रहा हूं और आप सब की दुआओं का असर है कि कभी निराशा हाथ नहीं लगी। उन्होंने कहा कि आज अपनों के बीच आकर उन्हें बेहद अच्छा लग रहा है।
देवेंद्र झाझड़िया ने कहा कि युवाओं को देश और समाज के प्रति रचनात्मक सोच रखनी चाहिए व्यक्ति किसी भी माध्यम से देश के विकास में अपना योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए चाहे वह किसी भी फील्ड में काम करें सकारात्मकता बहुत जरूरी है।शाखा प्रबंधक रामधन बुडानिया ने आभार जताया। इस दौरान देवेंद्र की धर्मपत्नी एवं कबड्डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी मंजू झाझड़िया, भाई अरविंद झाझड़िया का भी सम्मान किया गया। इस दौरान प्रबंधक (विक्रय) बलदेव दत्त सेवग, गुलाब सिंह चौधरी, लक्ष्मण रुद्र, सहायक निदेशक (जनसम्पर्क) कुमार अजय, मनोज शर्मा, लीलावती शर्मा, एसआर पायल सहित निगम के अधिकारी, कर्मचारी, नागरिक उपस्थित थे।

मिल चुका है सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार

वर्ष 2004 व वर्ष 2016 में पैरा ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद देवेंद्र टोक्यो पैरा ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम कर चुके हैं। देवेंद्र को विभिन्न अवार्ड व पुरस्कार मिल चुके हैं। भारत सरकार द्वारा खेल उपलब्धियों के लिए देवेंद्र को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया है। इससे पूर्व उन्हें पद्मश्री पुरस्कार, स्पेशल स्पोर्ट्स अवार्ड 2004, अर्जुन अवार्ड 2005, राजस्थान खेल रत्न, महाराणा प्रताप पुरस्कार 2005, मेवाड़ फाउंडेशन के प्रतिष्ठित अरावली सम्मान 2009 सहित अनेक इनाम-इकराम मिल चुके हैं तथा वे खेलों से जुड़ी विभिन्न समितियों के सदस्य रह चुके हैं।

साधारण किसान दंपत्ति की संतान हैं देवेंद्र

एक साधारण किसान दंपती रामसिंह और जीवणी देवी के आंगन में 10 जून 1981 को जन्मे देवेंद्र की जिंदगी में एकबारगी अंधेरा-सा छा गया, जब एक विद्युत हादसे ने उनका हाथ छीन लिया। खुशहाल जिंदगी के सुनहरे स्वप्न देखने की उम्र में बालक देवेंद्र के लिए यह हादसा कोई कम नहीं था। दूसरा कोई होता तो इस दुनिया की दया, सहानुभूति तथा किसी सहायता के इंतजार और उपेक्षाओं के बीच अपनी जिंदगी के दिन काटता लेकिन हादसे के बाद एक लंबा वक्त बिस्तर पर गुजारने के बाद जब देवेंद्र उठा तो उसके मन में एक और ही संकल्प था और उसके बचे हुए दूसरे हाथ में उस संकल्प की शक्ति देखने लायक थी। देवेंद्र ने अपनी लाचारी और मजबूरी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया, उल्टा कुदरत के इस अन्याय को ही अपना संबल मानकर हाथ में भाला थाम लिया और वर्ष 2004 में एथेंस पैराओलंपिक में भालाफेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत कर करिश्मा कर दिखाया।

लकड़ी के भाले से हुई शुरुआत

सुविधाहीन परिवेश और विपरीत परिस्थितियों को देवेेंद्र ने कभी अपने मार्ग की बाधा स्वीकार नहीं किया। गांव के जोहड में एकलव्य की तरह लक्ष्य को समर्पित देवेंद्र ने लकड़ी का भाला बनाकर खुद ही अभ्यास शुरू कर दिया। विधिवत शुरुआत हुई 1995 में स्कूली प्रतियोगिता से। कॉलेज में पढ़ते वक्त बंगलौर में राष्ट्रीय खेलों में जैवलिन थ्रो और शॉट पुट में पदक जीतने के बाद तो देवेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1999 में राष्ट्रीय स्तर पर जैवलिन थ्रो में सामान्य वर्ग के साथ कड़े मुकाबले के बावजूद स्वर्ण पदक जीतना देवेंद्र के लिए बड़ी उपलब्धि थी।

बुसान से हुई थी ओलंपिक स्वप्न की शुरुआत

इस तरह उपलब्धियों का सिलसिला चल पड़ा पर वास्तव में देवेंद्र के ओलंपिक स्वप्न की शुरुआत हुई 2002 के बुसान एशियाड में स्वर्ण पदक जीतने के साथ। वर्ष 2003 के ब्रिटिश ओपन खेलों में देवेंद्र ने जैवलिन थ्रो, शॉट पुट और ट्रिपल जंप तीनों स्पर्धाओं में सोने के पदक अपनी झोली में डाले। देश के खेल इतिहास में देवेंद्र का नाम उस दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा गया, जब उन्होंने 2004 के एथेंस पैरा ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इन खेलों में देवेंद्र द्वारा 62.15 मीटर दूर तक भाला फेंक कर बनाया गया विश्व रिकॉर्ड स्वयं देवेंद्र ने ही रियो में 63.97 मीटर भाला फेंककर तोड़ा। बाद में देवेंद्र ने वर्ष 2006 में मलेशिया पैरा एशियन गेम में स्वर्ण पदक जीता, वर्ष 2007 में ताईवान में अयोजित पैरा वर्ल्ड गेम में स्वर्ण पदक जीता और वर्ष 2013 में लियोन (फ्रांस) में हुई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक देश की झोली में डाला।

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