स्कूलों में नामांकन के साथ बच्चों का ठहराव भी सुनिश्चित किया जावे – जिला कलेक्टर

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चूरू। जिला कलक्टर ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि राजकीय स्कूलों में बच्चों के नामांकन के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जावे कि बच्चों की स्कूलों में ठहराव के प्रति रूचि पैदा होवें।
श्री गुप्ता सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के संबंध में बुलाई गई प्रेस काॅन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रत्येक राजकीय विद्यालय को नामांकन में गत सत्रा से 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए संस्था प्रधानों एवं उनकी टीम द्वारा प्रत्येक अभिभावक से सम्पर्क कर राजकीय विद्यालयों हेतु प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले संस्था प्रधानों/ शिक्षकों/ अभिभावकों को राष्ट्रीय दिवसों पर सम्मानित करवाया जायेगा। इससे विद्यालयों में शैक्षिक गतिविधियों को सुधारने एवं बढावा देने के कामों में प्रतिस्पर्धा को बढावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि राजकीय विद्यालयों में वर्ष 2018-19 हेतु नामांकनों के लिए प्रवेशोत्सव कार्यक्रम का प्रथम चरण 26 अप्रैल 2018 से 9 मई 2018 तक तथा दूसरा चरण 19 जून 2018 से 3 जुलाई 2018 तक रखा गया है।
उन्होंने बताया कि प्रवेशोत्सव के दौरान 0 से 18 वर्ष के समस्त बालक, बालिकाओं का सर्वे कर 0 से 5 वर्ष का आंगनबाड़ी पर तथा 5 से अधिक उम्र के बालक/ बालिकाओं का विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित करेंगे। शत-प्रतिशत बालक/ बालिकाओं का नामांकन व ठहराव सुनिश्चित करेंगे तथा समस्त विभागीय उपलब्धियों का व्यापक प्रचार-प्रसार, शिक्षा संगम कार्यक्रम का आयोजन कर परीक्षा परिणाम व अन्य उपलब्धियां अभिभावकों से साझा करेंगे। प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान नामांकन कार्यक्रम केन्द्र में रखकर बाल सभा, खेल कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, नव प्रवेशित बच्चों व अभिभावकों का स्वागत, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, आंगनबाड़ी पर मां सम्मेलन आयोजित कर प्रवेश योग्य बच्चों के नामांकन हेतु प्ररित किया जायेगा।
इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ड्राॅप आउट व अनामांकित की शून्य संख्या वाली पंचायत को ‘‘उजियारा पंचायत’’ के रूप में चिन्हित कर विशेष सम्मान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि दानदाताओं एवं भामाशाहों को सरकार के अधिकृत ज्ञान संकल्प पोर्टल के माध्यम से सीधे विद्यालयों को आॅनलाईन आर्थिक योगदान देना चाहिए ताकि स्कूलों में बच्चों के लिए बेहत्तर सुविधाएं विकसित की जा सके। उन्होंने कहा कि दानदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत आयकर छूट का प्रावधान है।

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