एसएस मोदी विद्या विहार में तीन दिवसीय शिक्षण प्रशिक्षण का समापन

अध्यात्म, तकनीक और नवाचार के संग शिक्षकों को मिले प्रभावी शिक्षण के गुर

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शहर के गौरव पथ स्थित एसएस मोदी विद्या विहार में आयोजित तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट एवं शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में शिक्षकों को अध्यात्म, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, डिजिटल शिक्षा, विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास, कक्षा प्रबंधन तथा व्यक्तित्व निर्माण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों के ज्ञान, कौशल एवं शिक्षण दक्षताओं को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा। प्रशिक्षण के दौरान हार्टफुलनेस मेडिटेशन के तेजपाल शेखावत ने शिक्षकों को जीवन मूल्यों, संस्कारों एवं ध्यान के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत होता है। ध्यान और आत्मचिंतन से शिक्षक तनावमुक्त रहकर बेहतर शिक्षण कर सकते हैं। आध्यात्मिक चिंतक पराग डालमिया ने विद्यालयी शिक्षा में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता जीवन प्रबंधन, नेतृत्व विकास, तनाव नियंत्रण और नैतिक मूल्यों की स्थापना का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के तीसरे दिन श्रद्धेय अर्जुनदास महाराज ने शिक्षकों को संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को प्रेम, सम्मान और सकारात्मक मार्गदर्शन देने पर जोर दिया। डिजिटल युग में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने विषय पर आयोजित सत्र में शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण, समूह गतिविधियों, प्रोजेक्ट आधारित अध्ययन, प्रश्नोत्तरी, कहानी कथन एवं संवादात्मक शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक केवल एक साधन है, जबकि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच मानवीय जुड़ाव ही प्रभावी शिक्षा की वास्तविक शक्ति है। एक अन्य सत्र में आत्मविश्वासी एवं प्रेरणादायी शिक्षक की भूमिका पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि शिक्षक का व्यवहार, संवाद शैली और सकारात्मक दृष्टिकोण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सम्मान और उनकी समस्याओं का समाधान ही एक आदर्श शिक्षक की पहचान है। विद्यालय समन्वयक मनीष अग्रवाल ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण रणनीतियों से परिचित कराते हैं, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है। प्राचार्य विजय मसीह ने कक्षा प्रबंधन एवं शिक्षण उद्देश्यों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया, जबकि अकादमिक निदेशक रॉय सी. पॉल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा और सीखने की ललक विकसित करने का आह्वान किया। समापन समारोह में मुख्य वक्ताओं श्रद्धेय अर्जुनदास महाराज, तेजपाल शेखावत, अभिनव सिंघल, कुंती सिंघल एवं पराग डालमिया का सम्मान किया गया। विद्यालय परिवार ने कार्यक्रम को शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर ट्रस्टी शशिकांत मोदी, गीलूराम मोदी, सौरभ मोदी, प्रियंक मोदी एवं कनिका मोदी ने शुभकामनाएं प्रेषित कीं।