प्रमुख शासन सचिव ने प्रसूता मृत्यु प्रकरण और अस्पताल व्यवस्थाओं की समीक्षा की, परिजनों से भी की मुलाकात
बीकानेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को पीबीएम अस्पताल का दौरा कर हाल ही में हुई प्रसूताओं की मौत के मामलों तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।दौरे के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने पोस्ट डिलीवरी वार्ड सहित विभिन्न वार्डों, मेडिसिन स्टोर, साफ-सफाई व्यवस्था, वेंटिलेशन सिस्टम तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रत्येक मरीज और प्रत्येक चिकित्सकीय मामला अपनी अलग जटिलता रखता है, ऐसे में किसी एक कारण को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव जीवन से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है और ऐसे मामलों में ‘क्लीन चिट’ जैसी स्थिति नहीं मानी जानी चाहिए।उन्होंने बताया कि अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन दवाओं के भंडारण और प्रबंधन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई है। साथ ही अस्पताल में बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए कॉरिडोर में आवागमन सुगम बनाने, साफ-सफाई व्यवस्था को और बेहतर करने तथा अनुपयोगी व पुराने सामान को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।दौरे के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने मृतक प्रसूताओं शारदा और प्रीति के परिजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और पक्ष भी सुना।उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति को 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई और आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
प्रमुख शासन सचिव के प्रमुख निर्देश
- अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार किया जाए।
- दवाओं के स्टोरेज सिस्टम को व्यवस्थित किया जाए।
- वार्डों और कॉरिडोर में आवागमन सुचारू बनाया जाए।
- अनुपयोगी और पुराने सामान को हटाया जाए।
- मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
10 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
प्रसूता मृत्यु प्रकरण की जांच के लिए संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।















