“नरेगा जाएं, बच्चों की दवाई लाएं या पानी भरें?” — सीकर की महिलाओं का छलका दर्द

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वार्ड 64 और 65 में डेढ़ महीने से गहराया जल संकट, महिलाओं ने दी आंदोलन की चेतावनी

सीकर। राहुल टांक
सीकर शहर के वार्ड नंबर 64 और 65 में गहराते जल संकट को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पिछले डेढ़ महीने से क्षेत्रवासी पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे सबसे ज्यादा परेशान महिलाएं हैं।महिलाओं का कहना है कि वे रोजाना घर के काम, बच्चों की जिम्मेदारी, मजदूरी और पानी की समस्या के बीच पिस रही हैं। महिलाओं ने दर्द बयान करते हुए कहा, “नरेगा में मजदूरी करने जाएं, बच्चों के लिए दवाई लेकर आएं, घर का काम करें या फिर घंटों पानी भरते रहें… अब हमसे ये सब नहीं होता।”क्षेत्र में हालात इतने खराब हैं कि लोग सुबह से रात तक पानी का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन नलों में पानी नहीं आता। महिलाएं दूर-दूर तक बर्तन और ड्रम लेकर पानी भरने को मजबूर हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड 64 और 65 की सीमा विवाद के कारण जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। एक ही गली के दोनों ओर अलग-अलग वार्ड होने से ना तो पानी की व्यवस्था सुधर रही है और ना ही सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।बढ़ते आक्रोश के बीच वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।