सीकर के सौरभ बागड़ी ने संघर्ष, असफलताओं और मेहनत के दम पर लिखी सफलता की नई इबारत
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सीकर | राहुल टांक
कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। इस कहावत को सीकर जिले के बुच्याणी निवासी सौरभ बागड़ी ने सच साबित कर दिखाया है। एक समय पढ़ाई में कमजोर माने जाने वाले सौरभ ने आज एक साथ चार-चार बैंकों में अधिकारी पद पर चयन पाकर नई मिसाल कायम की है।यह कहानी बताती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।
10वीं में कम अंक, लेकिन नहीं टूटा हौसला
सौरभ की शुरुआती पढ़ाई में खास रुचि नहीं थी। कक्षा 10वीं में उन्होंने मात्र 41 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जो उनके लिए एक बड़ा झटका था। हालांकि उन्होंने इसे अपनी असफलता मानकर हार नहीं मानी, बल्कि इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और खुद को साबित करने का संकल्प लिया। कमजोर शुरुआत के बावजूद सौरभ ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने मेहनत करते हुए 12वीं और फिर स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल का सामना धैर्य के साथ किया।

जीवनयापन के लिए किया सेल्समैन का काम
पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सेल्समैन का काम शुरू किया। वे दुकानों पर टॉफी, कैंडी और बिस्किट जैसी चीजों की सप्लाई करते थे। इस दौरान उन्होंने जिंदगी की कठिनाइयों को करीब से समझा।
दादाजी की प्रेरणा ने बदली दिशा
इसी दौरान उनके दादाजी भगवानदास बागड़ी, जो मजदूरी करते थे, ने उन्हें पढ़ाई का महत्व समझाया और सरकारी नौकरी की तैयारी करने की सलाह दी। दादाजी की यह सीख सौरभ के जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुई। कुछ समय बाद कैंसर के कारण दादाजी का निधन हो गया। इस घटना ने सौरभ को अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने ठान लिया कि वे दादाजी के सपनों को जरूर पूरा करेंगे और इसी लक्ष्य के साथ उन्होंने अपने करियर को नई दिशा दी।
असफलताओं से नहीं डिगे कदम
सौरभ ने अपने करियर के विकल्पों को तलाशते हुए बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर को चुना। उन्होंने पूरी लगन, अनुशासन और समर्पण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने 26 मेंस परीक्षाएं और 7 इंटरव्यू दिए, लेकिन हर बार सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे।
पिता का मिला मजबूत साथ
सौरभ के पिता रतनलाल बागड़ी ने भी उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने बेटे की मेहनत को देखते हुए उसे सेल्समैन का काम छोड़कर पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। परिवार का यह सहयोग उनकी ताकत बना। लगातार संघर्ष और मेहनत का परिणाम आखिरकार वर्ष 2026 में सामने आया। सौरभ का एक साथ चार प्रमुख बैंकिंग सेवाओं में चयन हुआ, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई।
चार बैंकों में एक साथ चयन
सौरभ का चयन राजस्थान ग्रामीण बैंक में ऑफिसर स्केल-1 (असिस्टेंट मैनेजर), आईडीबीआई बैंक में जूनियर असिस्टेंट मैनेजर, आईबीपीएस के माध्यम से यूको बैंक में कस्टमर सर्विस एसोसिएट और राजस्थान ग्रामीण बैंक में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर हुआ है।
परिवार और गुरुजनों को दिया श्रेय
सौरभ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादाजी, माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से ही वे इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। सौरभ का कहना है कि मार्कशीट के अंक सफलता का अंतिम पैमाना नहीं होते। अगर इंसान ठान ले और लगातार मेहनत करे, तो वह किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
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