समय पर उपकर नहीं चुकाया तो 24% ब्याज और 100% पेनल्टी के साथ कुर्की की कार्रवाई, एक संस्थान हो चुका सील
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिले में निर्माण श्रमिक उपकर यानी लेबर सेस की वसूली को लेकर श्रम विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को जिला कलक्टर सभागार में जिला कलक्टर डॉ. अरूण गर्ग की अध्यक्षता में आयोजित बीओसीडब्ल्यू टास्क फोर्स की बैठक में सेस वसूली की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 300 से अधिक निर्माण स्थलों के मालिकों एवं संस्थानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निर्धारित अवधि में उपकर जमा नहीं कराने पर ब्याज, पेनल्टी के साथ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
वर्क ऑर्डर की सूचना श्रम विभाग को देना जरूरी
बैठक का संचालन करते हुए श्रम कल्याण अधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने सरकारी विभागों एवं नगरीय निकायों को निर्माण कार्यों के कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) की सूचना श्रम विभाग को उपलब्ध कराने तथा प्रतिमाह जमा कराए गए सेस की सूचना कार्यालय को भेजना सुनिश्चित करने के निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग की ओर से जिले में निर्माण स्थलों का सर्वे कर उपकर निर्धारण की कार्रवाई की जा रही है।
श्रम निरीक्षकों द्वारा आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक भवनों के साथ ही शिक्षण संस्थान, धर्मशाला, निजी सामुदायिक भवन, होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, अस्पताल, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, वेयरहाउस और हाउसिंग सोसायटी सहित अन्य निर्माण स्थलों का सर्वे एवं क्षेत्रफल मापन किया जा रहा है।
निर्माण लागत का एक प्रतिशत देना होता है उपकर
श्रम कल्याण अधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि निर्माण कार्य की लागत का एक प्रतिशत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर के रूप में जमा कराया जाना है। 27 जुलाई 2009 के बाद निर्मित सरकारी, वाणिज्यिक एवं निजी आवासीय भवनों तथा निर्माण कार्यों को उपकर के दायरे में रखा गया है। निर्माण, परिवर्तन एवं मरम्मत से संबंधित कार्य भी इसके दायरे में शामिल हैं।
चौधरी ने बताया कि निर्धारित समय में उपकर जमा नहीं कराने पर नियोजक को 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके साथ ही 100 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान है। यानी जितनी उपकर राशि देय होगी, उतनी ही राशि अतिरिक्त पेनल्टी के रूप में देनी होगी। उन्होंने बताया कि जिले में कार्रवाई को अमलीजामा पहनाते हुए हाल ही में एक संस्थान को कुर्की नोटिस के बाद सील बंद किया जा चुका है। इससे स्पष्ट है कि नोटिस के बावजूद उपकर जमा नहीं कराने वालों के खिलाफ विभाग आगे भी सख्त कार्रवाई कर सकता है। श्रम विभाग ने सभी नियोजकों, ठेकेदारों एवं संस्थान प्रतिनिधियों से निर्माण कार्यों से संबंधित उपकर समय पर जमा कराने की अपील की है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के तहत उपकर निर्धारण के लिए आवश्यक जानकारी जुटाने के उद्देश्य से संस्थानों का निरीक्षण एवं सर्वे किया जा सकता है। समय पर उपकर जमा कराने से ब्याज एवं शास्ति से बचा जा सकता है।














