27 नवंबर अब मनाया जाएगा ‘अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस’, संयुक्त राष्ट्र महासभा के फैसले से बाल विवाह मुक्त विश्व की मुहिम को मिली नई ताकत
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ भारत में चल रहे अभियान को अब वैश्विक पहचान मिल गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को 27 नवंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस’ घोषित करने का अहम फैसला लिया। संयुक्त राष्ट्र का यह निर्णय बाल विवाह, कम उम्र एवं जबरन विवाह के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
राजस्थान महिला कल्याण मंडल, चाचियावास-अजमेर के निदेशक राकेश कुमार कौशिक ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से 27 नवंबर 2024 को शुरू किए गए देशव्यापी ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ की वर्षगांठ के दिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाना देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बाल विवाह के खिलाफ चल रही मुहिम को वैश्विक स्तर पर और मजबूती प्रदान करेगा। कौशिक ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) के संस्थापक भुवन रिभु ने मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में बाल विवाह उन्मूलन के लिए समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने की पहल की थी। उनके नेतृत्व में चल रही मुहिम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत सहित विश्व को बाल विवाह मुक्त बनाना है।
संयुक्त राष्ट्र का यह निर्णय इस दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम उपनिदेशक नानूलाल प्रजापति ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन देशव्यापी संगठन है और राजस्थान महिला कल्याण मंडल इसकी सदस्य संस्था के रूप में प्रदेश के अजमेर, बीकानेर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, चूरू एवं झुंझुनूं जिलों में बाल विवाह रोकथाम और जागरूकता के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि जेआरसी नेटवर्क के प्रयासों से देशभर में 5 लाख 50 हजार बाल विवाह रोकने में मदद मिली है। वहीं राजस्थान महिला कल्याण मंडल ने पिछले चार वर्षों में अपने कार्यक्षेत्र के छह जिलों में करीब 8 हजार संभावित बाल विवाह रोकने का कार्य किया है। संस्था की ओर से 10 लाख से अधिक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ भी दिलाई जा चुकी है। निदेशक राकेश कुमार कौशिक ने भुवन रिभु को विशेष बधाई और धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रभावी नेतृत्व के जरिए भारत से उठी बाल विवाह विरोधी आवाज को संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचाया गया। उन्होंने जेआरसी की टीम, जिला प्रशासन, बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में सहयोगी विभागों एवं अधिकारियों, संगठनों, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, विभिन्न हितधारकों और समुदाय के लोगों को भी बधाई दी।
उन्होंने कहा कि बचपन बचाने की इस मुहिम को अब और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए सभी विभागों, संस्थाओं और समाज के लोगों के बीच निरंतर सहयोग एवं समन्वय जरूरी है। संस्था की एक्सेस टू जस्टिस परियोजना की जिला समन्वयक चेतना शर्मा ने कहा कि 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किए जाने से जिले में पिछले चार वर्षों से चल रहे बाल विवाह रोकथाम एवं जागरूकता के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला टीम के सदस्यों को और बेहतर तरीके से काम करने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा देगा।
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