किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री से मिले सांसद राहुल कस्वां

मूंग की 100 फीसदी MSP खरीद, पीएम धन-धान्य योजना में मूंग-चना को शामिल करने और फसल बीमा की समस्याओं के समाधान की मांग

नई दिल्ली। चूरू सांसद राहुल कस्वां ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राजस्थान, विशेषकर शेखावाटी और बीकानेर संभाग के किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। सांसद ने किसानों की फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद, पीएम धन-धान्य योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर केंद्रीय मंत्री से आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

राजस्थान में 100 फीसदी मूंग खरीद की मांग

सांसद कस्वां ने समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र और बीकानेर संभाग देश के प्रमुख मूंग उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 5.23 लाख टन मूंग खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन खरीद व्यवस्था में राजस्थान के किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों और किसान संगठनों के आंदोलन के बाद वहां कुल उत्पादन की 25 प्रतिशत खरीद की सीमा बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं राजस्थान का बड़ा हिस्सा असिंचित और वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर है। ऐसे में मौसम और अन्य परिस्थितियों के कारण यहां के किसानों को पहले से ही आर्थिक जोखिम उठाना पड़ता है।सांसद ने केंद्र सरकार से राजस्थान में भी मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था करने की मांग की, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके।

पीएम धन-धान्य योजना में मूंग और चना शामिल करने की मांग

कस्वां ने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत राजस्थान के चयनित आठ जिलों का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने कहा कि योजना में दलहन की शत-प्रतिशत खरीद का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसमें तुअर, उड़द और मसूर को शामिल किया गया है।सांसद के अनुसार राजस्थान के चयनित जिलों में इन फसलों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, जबकि मूंग और चना जैसी फसलें बड़े स्तर पर पैदा होती हैं। ऐसे में इन दोनों फसलों को योजना से बाहर रखने से क्षेत्र के किसानों को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।उन्होंने मांग की कि किसान हित को ध्यान में रखते हुए पीएम धन-धान्य योजना में मूंग और चना को भी शामिल किया जाए।

योजना की समितियों में किसान प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

सांसद ने योजना के तहत जिला और राज्य स्तर पर गठित होने वाली समितियों का विषय भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन समितियों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया है।कस्वां ने कहा कि किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी से स्थानीय स्तर की कृषि समस्याओं, सुझावों और जरूरतों को सीधे समिति के सामने रखा जा सकेगा। उन्होंने जिला एवं राज्य स्तरीय समितियों में जनप्रतिनिधियों तथा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की।

फसल बीमा के लिए Farmer ID की अनिवार्यता का मुद्दा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ-2026 की बीमा प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए सांसद ने कहा कि राजस्थान में किसानों के लिए बीमा करवाने की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 निर्धारित है। इस बार आवेदन के दौरान Farmer ID मांगे जाने से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 50 प्रतिशत से अधिक किसानों के पास अभी Farmer ID नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि इसे अनिवार्य रखा गया तो बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा योजना से बाहर हो सकते हैं।सांसद ने केंद्र सरकार से Farmer ID को फिलहाल वैकल्पिक रखने की मांग की, ताकि पात्र किसान समय पर अपनी फसल का बीमा करवा सकें।

हनुमानगढ़ में CSC के जरिए बीमा कराने की सुविधा जारी रखने की मांग

कस्वां ने हनुमानगढ़ जिले में फसल बीमा प्रक्रिया से जुड़ी समस्या भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि जिले में ओरिएंटल एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किसानों का फसल बीमा किया जा रहा है और किसानों के समक्ष बैंक के माध्यम से ही बीमा करवाने की बाध्यता की स्थिति सामने आ रही है।सांसद ने कहा कि क्षेत्र के कई किसान पहले से CSC के माध्यम से फसल बीमा करवाते रहे हैं। ऐसे में CSC के जरिए बीमा कराने के इच्छुक किसानों को इस सुविधा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से संबंधित बीमा कंपनी को आवश्यक निर्देश देने की मांग की, ताकि किसान अपनी सुविधा के अनुसार CSC के माध्यम से भी बीमा करा सकें।

SGRC और STAC में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

सांसद ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य स्तर पर किसानों की शिकायतों और तकनीकी मामलों के समाधान के लिए गठित होने वाली SGRC (राज्य शिकायत निवारण समिति) और STAC (राज्य तकनीकी सलाहकार समिति) का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने कहा कि इन समितियों में संबंधित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किए जाने से किसानों की समस्याओं और स्थानीय परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से रखने का अवसर सीमित हो जाता है।कस्वां ने केंद्रीय कृषि मंत्री से मांग की कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दिशा-निर्देशों में आवश्यक प्रावधान कर SGRC और STAC में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करना सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों की समस्याओं का प्रभावी और समयबद्ध समाधान हो सके।सांसद राहुल कस्वां ने केंद्रीय मंत्री से किसानों से जुड़े इन सभी विषयों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

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