झुंझुनूं की शिक्षा के नवाचारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, अजय पीरामल ने परखी जमीनी हकीकत

डाइट में शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों व पीरामल फाउंडेशन टीम से किया संवाद, एनईपी-2020 के क्रियान्वयन और स्कूलों में बदलाव का लिया फीडबैक, 21वीं सदी के कौशलों पर आधारित रिसोर्स-वेलनेस सेंटर का किया अवलोकन, शिक्षकों के प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास की सराहना की

ALSO FOLLOW INTERVIEWER INDIA ON FACEBOOK  YOUTUBE 

झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
जिले के मूल निवासी एवं देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति अजय पीरामल मंगलवार को झुंझुनूं दौरे पर रहे। शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूचि रखने वाले पीरामल ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), झुंझुनूं पहुंचकर शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों और पीरामल फाउंडेशन की टीम के साथ करीब सवा घंटे तक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के जिले में हो रहे क्रियान्वयन, शैक्षिक नवाचारों तथा विद्यालय स्तर पर उनके प्रभाव की विस्तार से जानकारी ली। डाइट परिसर पहुंचने पर प्राचार्या सुमित्रा झाझड़िया, जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र खीचड़, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी राजेश हलवान, प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार, दीपेन्द्र बुडानिया, प्रतिभा न्यौला, राजबाला एवं संस्थापन अधिकारी विक्रम शेखावत सहित अन्य अधिकारियों ने अजय पीरामल का स्वागत किया। इस अवसर पर ओसवाल ग्रुप के उद्योगपति रामदेव अग्रवाल एवं सुनीता अग्रवाल भी मौजूद रहे।

एनईपी के प्रभाव से लेकर स्कूलों की जमीनी तस्वीर तक चर्चा

बैठक में अजय पीरामल ने शिक्षा विभाग एवं पीरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों पर पड़ रहे प्रभाव की जानकारी लेते हुए शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों को समझा। उन्होंने डाइट परिसर में विकसित 21वीं सदी की दक्षताओं पर आधारित रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों की सराहना की। पीरामल ने शिक्षकों से सीधे संवाद कर प्रशिक्षण के अनुभव तथा विद्यालयों में उसके उपयोग के बारे में भी जानकारी ली।

‘झुंझुनूं के नवाचार दूसरे जिलों के लिए बन सकते हैं मॉडल’

अजय पीरामल ने कहा कि झुंझुनूं में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और डाइट स्टाफ के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि झुंझुनूं में विकसित हो रहे शैक्षिक नवाचार आने वाले समय में राजस्थान ही नहीं, देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीरामल परिवार लंबे समय से सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहा है और वर्ष 2008 से पीरामल फाउंडेशन के माध्यम से इन प्रयासों को व्यापक स्वरूप दिया गया है। झुंझुनूं में शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन के बीच विकसित हुए सहयोगात्मक मॉडल पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।

2,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण, कक्षा-कक्ष तक पहुंच रहा असर

डाइट प्राचार्या सुमित्रा झाझड़िया ने बताया कि संस्थान में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से एनईपी-2020 की अवधारणाओं के अनुरूप रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर के रूप में कार्य किया जा रहा है। पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि, विद्यार्थियों के कौशल विकास, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य तथा उनके समग्र विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष करीब 2,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी लगभग 2,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रशिक्षण के बाद विद्यालयों में जाकर यह भी देखा जाता है कि शिक्षक प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को कक्षा-कक्ष में किस प्रभावी तरीके से लागू कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और शिक्षकों की सक्रियता उत्साहजनक है। हालांकि ड्रॉप आउट विद्यार्थियों तथा प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती है।

बाल संसद से ‘गागर में सागर’ तक, नवाचारों ने खींचा ध्यान

प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार ने बताया कि अजय पीरामल ने शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों की जमीनी स्थिति जानने के लिए अधिकारियों एवं शिक्षकों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने डाइट में विकसित विभिन्न नवाचारों के बारे में भी जानकारी ली।उन्होंने बताया कि डाइट झुंझुनूं में 21वीं सदी के कौशलों पर आधारित रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर, बाल संसद पुस्तिका, ‘गागर में सागर’ पहल के माध्यम से प्रभावी प्रार्थना सभा तथा ‘हम होंगे कामयाब’ मोटिवेशनल सेमिनार जैसे नवाचार संचालित किए जा रहे हैं। इन नवाचारों को देखने और समझने के लिए हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, उदयपुर सहित विभिन्न राज्यों एवं जिलों की डाइट टीमों द्वारा अध्ययन भ्रमण भी किया जा चुका है। प्रभागाध्यक्ष दीपेन्द्र बुडानिया ने कहा कि अजय पीरामल का झुंझुनूं दौरा शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन की पूरी टीम के लिए प्रेरणादायी रहा। उनके मार्गदर्शन और संवाद से शिक्षा सुधारों की दिशा में कार्य कर रहे अधिकारियों एवं शिक्षकों को और अधिक समर्पण, ऊर्जा और उत्साह के साथ काम करने की प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम में रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर में पीरामल फाउंडेशन की ओर से भूमिका निभा रहे शेरसिंह, जिले के विभिन्न ब्लॉकों के शिक्षा अधिकारी, शिक्षक, डाइट स्टाफ सदस्य तथा पीरामल फाउंडेशन झुंझुनूं की टीम के सदस्य मौजूद रहे।