शिव महापुराण कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन

हनुमान अवतार प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर, श्रावण मास में चल रही कथा के छठे दिन संतोष सागर महाराज ने शिव भक्ति, सेवा और समर्पण का दिया संदेश; ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा पंडाल

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चूरू। मंत्रियों की छतरी स्थित झड़िया मोरी में श्रावण मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा वाचक पूज्य संतोष सागर जी महाराज ने भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए उनके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की दिव्य शक्ति के प्रतीक हैं। इनका दर्शन, पूजन और स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से शिव भक्ति को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।कथा के दौरान संतोष सागर महाराज ने भगवान शिव के अंशावतार माने जाने वाले श्री हनुमान जी के अवतार का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जीवन भक्ति, सेवा, त्याग, विनम्रता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण है। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।कथा के बीच-बीच में भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के जयघोषों से पंडाल गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, मातृशक्ति और शिवभक्तों ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव एवं श्री हनुमान जी की आरती कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।यह आयोजन समस्त शिव भक्त साधक परिवार, चूरू के तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।