न्यायालय ने परिवादिया पर लगाया जुर्माना, सदर थाना पुलिस की कार्रवाई, झूठे प्रकरण दर्ज कराने वालों के खिलाफ अभियान जारी
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
झूठे मुकदमे दर्ज कर कानून का दुरूपयोग करने वालों के विरूद्ध जिला पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस थाना सदर द्वारा दर्ज एक प्रकरण में अनुसंधान के दौरान आरोप पूरी तरह झूठे पाए जाने पर पुलिस द्वारा न्यायालय में इस्तगासा पेश किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने परिवादिया को दोषी ठहराते हुए अर्थदंड से दंडित किया। पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह राजावत के मार्गदर्शन तथा वृत्ताधिकारी झुंझुनूं शहर गोपाल सिंह ढाका के निकटतम सुपरविजन में थाना सदर के थानाधिकारी मांगीलाल मीणा के नेतृत्व में गठित टीम पुलिस मुख्यालय राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार झूठे प्रकरण दर्ज कराने वालों के विरूद्ध विशेष अभियान चला रही है।इसी अभियान के तहत पुलिस थाना सदर में दर्ज प्रकरण संख्या 02/2025 की गहन जांच की गई। अनुसंधान में मामला झूठा पाए जाने पर परिवादिया सावित्री देवी पत्नी रामदेवाराम (75 वर्ष), निवासी कुल्हरियों की ढाणी, तन बीबासर, थाना सदर झुंझुनूं के विरूद्ध माननीय न्यायालय में पुलिस इस्तगासा प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के बाद 7 जुलाई 2026 को न्यायालय ने परिवादिया को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 217 के तहत दोषी करार देते हुए 100 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया। जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि झूठे मुकदमे दर्ज कर कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना तथा वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कार्रवाई टीम में मांगीलाल मीणा – पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी, पुलिस थाना सदर झुंझुनूं , वीरेन्द्र कुमार – हेड कांस्टेबल , पुलिस थाना सदर झुंझुनूं , राजेन्द्र कुमार – कांस्टेबल पुलिस थाना सदर झुंझुनूं , रिंकू – कांस्टेबल, पुलिस थाना कोतवाली, झुंझुनूं शामिल रहें ।
पुलिस का संदेश: झूठे मुकदमे दर्ज कर कानून का दुरूपयोग करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता बनी रहे और वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।










