मुखर्जी जयंती पर जिला मुख्यालय में एकीकृत आयोजन नहीं हो सका; शहर मंडल, जिलाध्यक्ष, विधायक और बूथ स्तर पर अलग-अलग कार्यक्रमों ने संगठनात्मक समन्वय पर खड़े किए सवाल?
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश को “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का संदेश दिया था। लेकिन उनकी 125वीं जयंती पर झुंझुनूं जिला मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी स्वयं संगठनात्मक एकरूपता का प्रदर्शन नहीं कर सकी। एक ही अवसर पर चार अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम पूरे दिन राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चाओं का विषय बने रहे। जिला मुख्यालय पर शहर मंडल की बैठक, रीको क्षेत्र स्थित बूथ संख्या-9 का अलग कार्यक्रम, बूथ संख्या-49 का अलग आयोजन तथा विधायक आवास पर स्वतंत्र श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ। चारों आयोजनों का उद्देश्य एक ही था—डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि—लेकिन मंच अलग-अलग रहे। सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि जिस पार्टी की पहचान अनुशासित संगठन और सामूहिक नेतृत्व से जुड़ी मानी जाती है, वह जिला मुख्यालय पर एक साझा श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक आयोजित नहीं कर सकी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि एक ही अवसर पर समान प्रकृति के कई कार्यक्रम संगठनात्मक समन्वय को लेकर स्वाभाविक प्रश्न खड़े करते हैं।
एक विचार, लेकिन चार आयोजन
-कोतवाली के सामने बाबा प्रकाशपुरी रेस्टोरेंट में शहर मंडल की बैठक हुई, जहां संगठनात्मक चर्चा के साथ डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसी दौरान रीको क्षेत्र के बूथ संख्या-9 पर जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी के आतिथ्य में अलग श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ। उधर बूथ संख्या-49 पर भी अलग आयोजन हुआ, जबकि विधायक राजेंद्र भांबू ने विधायक आवास पर स्वतंत्र श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। चारों कार्यक्रमों में डॉ. मुखर्जी के विचारों, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे, लेकिन एक साझा मंच का अभाव पूरे घटनाक्रम पर भारी पड़ता दिखाई दिया।
कार्यकर्ताओं के बीच भी रही चर्चा
भाजपा के कई कार्यकर्ता और राजनीतिक जानकार पूरे दिन इस बात पर चर्चा करते रहे कि यदि सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य एक ही था, तो उन्हें एक मंच पर आयोजित करने में बाधा क्या थी। कई पदाधिकारी अलग-अलग आयोजनों में नजर आए, जिससे समन्वय को लेकर सवाल और गहरे हुए।
संदेश और व्यवहार में अंतर?
हर मंच से डॉ. मुखर्जी के “एक देश, एक विधान” के संदेश का उल्लेख किया गया, लेकिन जिला मुख्यालय पर एक ही दिन चार अलग-अलग कार्यक्रम होने से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठता रहा कि क्या संगठन अपने ही सार्वजनिक संदेश के अनुरूप एकजुटता का प्रदर्शन कर पाया।
प्रदेश नेतृत्व की नजरें क्या जाएंगी इस ओर?
जिला मुख्यालय पर एक ही अवसर पर कई समानांतर कार्यक्रमों ने संगठनात्मक समन्वय को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी संगठन भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों को लेकर समन्वय की कोई नई व्यवस्था करता है या नहीं।












