सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का संकट गहराया, वर्षों से बिना अनुमति गायब चिकित्सकों पर अब जागा विभाग; झुंझुनूं के 23 डॉक्टर भी घेरे में, सोमवार तक जाएगी रिपोर्ट
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक ओर सरकार सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करती रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में करीब 600 चिकित्सक लंबे समय से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए हैं। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि लाखों मरीजों के स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर चिकित्सक वर्षों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहे तो विभागीय निगरानी व्यवस्था आखिर करती क्या रही? मरीज डॉक्टरों के अभाव में इलाज के लिए भटकते रहे, अस्पतालों में लंबी कतारें लगती रहीं और विशेषज्ञ सेवाएं प्रभावित होती रहीं, लेकिन विभाग अब जाकर कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। झुंझुनूं जिले से भी 23 चिकित्सकों के नाम विभाग द्वारा जारी सूची में शामिल किए गए हैं। इनमें 12 विशेषज्ञ चिकित्सक और 11 एमबीबीएस डॉक्टर बताए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति का सीधा असर जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उपचार व्यवस्था पर पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित राजकीय बीडीके जिला अस्पताल रहा है, जहां कार्यरत 9 चिकित्सकों के नाम सूची में शामिल हैं। इसके अलावा नवलगढ़ जिला अस्पताल का भी एक चिकित्सक सूची में है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ. रविप्रकाश शर्मा ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे चिकित्सकों का विस्तृत रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने चिकित्सकों की सेवा संबंधी जानकारी, अनुपस्थिति की अवधि, अब तक की गई विभागीय कार्रवाई तथा अन्य संबंधित विवरण मांगे हैं ताकि प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा कर राजस्थान सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सके। झुंझुनूं के सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने पुष्टि की कि विभाग से जिले के 23 चिकित्सकों की सूची प्राप्त हुई है। सभी मामलों का सत्यापन किया जा रहा है तथा सोमवार तक विस्तृत रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेज दी जाएगी।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सूची में शामिल कई चिकित्सकों ने स्थानांतरण के बाद नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया। कुछ चिकित्सकों ने नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद ज्वाइन नहीं किया, जबकि कुछ सेवारत कोटे से पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी पदस्थापन मिलने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए।स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रकार की अनुपस्थिति राजस्थान सेवा नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ शासकीय आदेशों की अवहेलना और सरकारी दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आती है। यही कारण है कि अब प्रत्येक चिकित्सक के पूरे सेवा रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है। प्रदेशभर में लगभग 600 चिकित्सकों के लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने का मामला सामने आने के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि विभाग अब ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। झुंझुनूं के 23 चिकित्सकों की रिपोर्ट भी राज्य मुख्यालय पहुंचने के बाद विभागीय कार्रवाई तेज होने की संभावना है। सरकारी अस्पताल पहले ही डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में चिकित्सकों का वर्षों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहना केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर संकट का संकेत है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग की प्रस्तावित कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जवाबदेही तय कर स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।










