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Home राजस्थान झुंझुनूं री-नीट में फिजिक्स ने बढ़ाई मुश्किल, बायोलॉजी रही आसान

री-नीट में फिजिक्स ने बढ़ाई मुश्किल, बायोलॉजी रही आसान

नीट के मुकाबले रीट नीट में घटी परीक्षा देने वालों का प्रतिशत, अधिकांश विद्यार्थियों ने बताया मूल नीट से कठिन था पेपर

झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित री-नीट परीक्षा रविवार को जिले के 21 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा के बाद बाहर निकले अधिकांश अभ्यर्थियों ने बायोलॉजी को आसान, केमिस्ट्री को मध्यम और फिजिक्स को अपेक्षाकृत कठिन बताया। विद्यार्थियों का कहना था कि री-नीट का प्रश्नपत्र 3 मई को हुई मूल नीट परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन रहा। विशेषकर फिजिक्स सेक्शन ने उन्हें चुनौती दी। झुंझुनूं जिले में इस बार कुल 6872 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। जिनमें से 6425 परीक्षा में शामिल हुए जबकि 647 अनुपस्थित रहे। उपस्थिति प्रतिशत 93.49 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके मुकाबले 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में 6483 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। जिनमें से 6379 उपस्थित हुए और केवल 104 अनुपस्थित रहे थे। उस समय उपस्थिति प्रतिशत 98.40 प्रतिशत रहा था। आंकड़ों के अनुसार री-नीट में पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या 389 बढ़ी। लेकिन अनुपस्थित रहने वालों की संख्या भी काफी अधिक रही। परीक्षा देकर बाहर निकले विद्यार्थियों ने बताया कि बायोलॉजी का पेपर अपेक्षाकृत आसान था। हालांकि स्टेटमेंट आधारित प्रश्नों की संख्या अधिक रही। वहीं केमिस्ट्री मध्यम स्तर की रही, जबकि फिजिक्स ने सबसे अधिक समय लिया। कई विद्यार्थियों का कहना था कि इस बार का पेपर मूल नीट परीक्षा से कठिन था और इसी कारण कटऑफ पिछले अनुमान से कम जा सकती है। विद्यार्थियों ने कहा कि यदि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष रही तो मेरिट पर इसका प्रभाव दिखाई देगा। अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं को सामान्य रूप से संतोषजनक बताया। हालांकि कुछ छात्रों ने बारिश के कारण परीक्षा कक्षों में पानी आने और बिजली व्यवस्था में सुधार की जरूरत भी जताई। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रों पर बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। री-नीट में शामिल विद्यार्थियों ने यह भी स्वीकार किया कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटना ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया था। कई छात्रों ने कहा कि एक बार परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा उसी स्तर की तैयारी और मानसिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। इसके बावजूद परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने फिर से तैयारी की और परीक्षा दी। परीक्षा केंद्रों के बाहर मौजूद अभिभावकों ने भी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाया। एक अभिभावक ने कहा कि जीवन में सफलता केवल एक परीक्षा पर निर्भर नहीं होती और बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। उनका कहना था कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण है तथा अभिभावकों को हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहना चाहिए। कुल मिलाकर री-नीट परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन पेपर के स्तर और घटी उपस्थिति ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस बार परिणामों और कटऑफ को लेकर तस्वीर 3 मई की परीक्षा से अलग हो सकती है।

नीट के बाद लौट आए विद्यार्थियों ने झुंझुनूं से दी परीक्षा!

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में जिले के 21 केंद्रों पर 6483 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 6872 हो गई। यानी री-नीट परीक्षा में 389 अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के पीछे एक प्रमुख कारण एनटीए द्वारा परीक्षा केंद्र बदलने का अवसर दिए जाना माना जा रहा है। संभावना है कि कई स्थानीय विद्यार्थियों ने री-नीट के लिए अपने गृह जिले झुंझुनूं को परीक्षा केंद्र के रूप में चुना हो। नीट परीक्षा के बाद अधिकांश विद्यार्थी अपने घर लौट गए थे और उन्होंने स्थानीय स्तर पर कोचिंग संस्थानों व शिक्षकों के मार्गदर्शन में री-नीट की तैयारी की।

मानसिक दबाव की बात स्वीकारी

री-नीट परीक्षा देने पहुंचे कई अभ्यर्थियों ने बताया कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटना ने उनके आत्मविश्वास को जरूर प्रभावित किया है। विद्यार्थियों का कहना था कि महीनों की मेहनत के बाद परीक्षा रद्द होने से मानसिक दबाव बढ़ा और दोबारा तैयारी करना आसान नहीं था। कई छात्रों ने स्वीकार किया कि एक बार पेपर लीक होने के बाद सिस्टम पर भरोसा और खुद का कॉन्फिडेंस दोनों प्रभावित होते हैं। हालांकि अभ्यर्थियों ने कहा कि इस कठिन समय में परिजनों ने उनका हौसला बढ़ाया और लगातार मोटिवेट किया। इसी वजह से वे दोबारा पूरी तैयारी और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने पहुंचे हैं। परीक्षा केंद्रों के बाहर कई विद्यार्थियों के चेहरों पर पिछली घटना की निराशा साफ दिखाई दी। लेकिन साथ ही अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद और डॉक्टर बनने का सपना भी नजर आया। छात्रों का कहना था कि अब वे चाहते हैं कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हो ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन हो सके।

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