आज एक बार फिर देश के अन्नदाता की आवाज लोकसभा में गूंजी
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय को उठाया। सांसद ने कहा कि देश का किसान आज भी अपनी मेहनत की उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार द्वारा धान, गेहूं, चावल, सरसों सहित अनेक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। जबकि किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सीमित सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण सभी किसानों की पूरी उपज की खरीद भी सुनिश्चित नहीं हो पाती। जिससे किसान बिचौलियों के शोषण का शिकार बनते हैं और अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हो जाते हैं। सांसद ने सरकार से मांग कि है कि किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा के लिए एमएसपी को कानूनी गारंटी प्रदान की जाए। ताकि प्रत्येक किसान को अपनी उपज का निर्धारित न्यूनतम मूल्य निश्चित रूप से मिल सके। साथ ही एक पारदर्शी, सशक्त और व्यापक खरीद प्रणाली भी विकसित की जाए। जिससे हर किसान की पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित हो सके और उसे न्यायसंगत मूल्य प्राप्त हो। सांसद ने कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी किसानों की मांग ही नहीं है यह उनका अधिकार भी है। किसान देश का अन्नदाता है। उसके सीधेपन का फायदा उठाकर सरकार उनको बार बार धरने पर बैठने पर मजबूर नहीं करे। सांसद ने कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। बल्कि कृषि क्षेत्र को वास्तव में लाभकारी, सम्मानजनक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।
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