17 अगस्त को निकायों के वार्डों की लॉटरी के साथ जिला परिषद सदस्य, प्रधान व पंचायत समिति सदस्यों का आरक्षण होगा तय
18 अगस्त को सभी उपखंड मुख्यालयों पर सरपंच-वार्ड पंचों के निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण; दावेदारों की धड़कनें बढ़ीं
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झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जिले में आगामी नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 17 और 18 अगस्त को होने वाली आरक्षण प्रक्रिया के साथ ही जिले के निकाय और पंचायत चुनावों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। आरक्षण की लॉटरी को लेकर संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की नजरें अब प्रशासन की इस प्रक्रिया पर टिक गई हैं। आरक्षण की श्रेणी बदलते ही कई दावेदारों की चुनावी रणनीति बदलना तय माना जा रहा है ।
17 अगस्त को निकाय वार्डों की लॉटरी
कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग ने बताया कि 17 अगस्त को सुबह 11 बजे सूचना केंद्र सभागार में जिले की एक नगर परिषद और 18 नगरपालिकाओं के वार्डों के वर्गवार आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इसी दिन जिला परिषद सदस्यों, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्यों के पदों का भी आरक्षण निर्धारित किया जाएगा। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निकायों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट होने लगेगी। कई वार्डों में आरक्षण बदलने की स्थिति में दावेदारों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है।
18 अगस्त को सरपंच और वार्ड पंचों का नंबर
वहीं 18 अगस्त को दोपहर 2 बजे सभी उपखंड मुख्यालयों पर पंचायती राज संस्थाओं के सरपंच एवं वार्ड पंचों के निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद ग्राम पंचायतों में भी चुनावी समीकरण तेजी से बदलने की संभावना है। जिन पंचायतों में आरक्षण की श्रेणी बदलेगी, वहां नए दावेदारों के लिए रास्ता खुलेगा। वहीं कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों और चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों को दूसरी पंचायत या वार्ड से चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी पड़ सकती है।
पारदर्शिता और सुरक्षा पर प्रशासन का जोर
कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग ने सभी उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आरक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्धारित नियमों के अनुसार कराई जाए। लॉटरी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अध्यक्ष पदों के बाद अब वार्ड आरक्षण पर नजर
नगर निकायों के अध्यक्ष पदों का आरक्षण पहले ही तय हो चुका है। अब वार्डों का आरक्षण सामने आने के बाद निकाय चुनाव का वास्तविक राजनीतिक गणित स्पष्ट होने लगेगा। जिन संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी किसी खास वार्ड से जुड़ी है, उनके लिए आरक्षण सबसे महत्वपूर्ण हो गया है। सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य आरक्षित श्रेणियों के अनुसार वार्ड तय होने के साथ ही कई नेताओं की चुनावी राह आसान होगी तो कई को अपना क्षेत्र बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
गांवों में भी बदलेगा सियासी गणित
18 अगस्त की पंचायत आरक्षण प्रक्रिया के बाद गांवों में भी चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही दावेदारों की सक्रियता बढ़ेगी और कई पंचायतों में नए चेहरे सामने आ सकते हैं।अब 17 और 18 अगस्त की आरक्षण लॉटरी पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं। इन दो दिनों में तय होने वाला आरक्षण न केवल संभावित प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगा, बल्कि आगामी चुनावों में जिले के कई क्षेत्रों का सियासी समीकरण भी बदल सकता है।
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