झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का प्रतीक गणगौर उत्सव इस बार झुंझुनूं में बेहद खास होने वाला है। श्री गोपाल गौशाला के तत्वाधान में आगामी 21 मार्च को गणगौर माता की शाही सवारी पूरे वैभव और धूमधाम के साथ निकाली जाएगी। यह शाही सवारी श्री गोपाल गौशाला परिसर से दोपहर साढ़े तीन बजे रवाना होगी। जो गौशाला से रवाना होकर झुंझुनूं एकेडमी, लावरेश्वर महादेव मंदिर, श्याम मंदिर, चूणा चौक और राणी सती रोड होते हुए गुजरेगी। शाम 5.30 बजे सवारी छावनी बाजार पहुंचेगी। जहां आचार्य अनिल शुक्ला के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अतिथियों के सानिध्य में माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। छावनी बाजार से होते हुए सवारी जोशियों का गट्टा, गुदड़ी बाजार और कपड़ा बाजार से होकर श्री शंकरदास जी महाराज के आश्रम (समस तालाब) पहुंचेगी। यहां अंतिम पूजा के बाद सवारी खेतानों का मोहल्ला होते हुए वापस गौशाला लौटेगी। गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया और मंत्री प्रदीप पटोदिया ने बताया कि आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। संयोजक नारायण प्रसाद जालान और डॉ. डीएन तुलस्यान के निर्देशन में राजस्थानी कलाकारों द्वारा मार्ग में जगह-जगह सजीव झांकियां और नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा। सवारी में ऊंट, घोड़ों का लवाजमा और बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। छावनी बाजार में श्री गल्ला व्यापार संघ द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विश्राम और शीतल पेय की व्यवस्था की जाएगी। आपको बता देंकि गणगौर का पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सुहाग और श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि होली के अगले दिन से 16 दिनों तक कुंवारी कन्याएं और विवाहित महिलाएं ईसर-गणगौर की पूजा करती हैं। नवविवाहिताएं शादी के पहले साल पीहर जाकर इस पर्व को मनाती हैं, जिसे सुहाग पर्व भी कहा जाता है। राजस्थानी लोक कहावत के अनुसार, गणगौर के विदाई के साथ ही त्यौहारों का सिलसिला थम जाता है, जो पुनः श्रावण की तीज से शुरू होता है।
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