डेंगू एवं अन्य मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए जिला कलक्टर ने दिए निर्देश

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डेंगू मुक्त राजस्थान अभियान में होंगी विभिन्न गतिविधियां अग्रिम आदेश तक अवकाश पर नहीं जा सकेंगे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी

चूरू। जिले में डेंगू एवं अन्य मौसमी बीमारियों के फैलाव व आशंकाओं के मध्येनजर 3 नवंबर तक डेंगू मुक्त राजस्थान अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। जिला कलक्टर साँवर मल वर्मा ने 3 नवंबर तक चलने वाले डेंगू मुक्त राजस्थान अभियान के दौरान बीमारियों से बचाव, रोकथाम एवं उपचार के लिए आवश्यक गतिविधियां सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ।
जिला कलक्टर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि मौसमी बीमारियों से बचाव व नियंत्रण के लिए रोग की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर मेडिकल टीम द्वारा घर-घर सर्वे कर चिन्हित रोगियों को आवश्यक दवाएं, उपचार उपलब्ध करवाया जाए तथा आमजन को बीमारी के प्रति जागरुक किया जाए। जिले में प्रमुखतः डेेंगू, मलेरिया एवं स्क्रब टाइफस के मरीज पाए जा रहे हैं लेकिन लक्षणों के आधार पर कोविड-19, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया, जीका, पीलिया, हैजा, उल्टी-दस्त, लेप्टोस्पायरोसिस आदि की संभावनाओं को भी ध्यान में रखते हुए उपचार किया जाए।

निर्देशों में कहा गया है कि पूर्व में बीएलओ क्षेत्र के अनुसार गठित दल के माध्यम से संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र में घर-घर सर्वे किया जाए। सर्वे दल को पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर, सामान्य मौसमी बीमारियों में काम आने वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा आमजन को मौसमी बीमारियों से बचाव के पंपलेट वितरित किए जाएं। जिला स्तर पर 24 घंटे लगातार नियंत्रण कक्ष का संचालन किया जाए। समस्त चिकित्सा संस्थानों में मौसमी बीमारी के लिए पर्याप्त संख्या में बैड आरक्षित रखे जाएं। अस्पतालों में बैड ऑक्यूपैंसी की समीक्षा प्रतिदिन की जाए एवं इसकी दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन सवेरे 10 बजे कलक्ट्रेट कंट्रोल रूम में पहुंचाई जाए। आवश्यकता अनुसार इलेक्टिव सर्जरी को स्थगित करने एवं अस्पतालों में उपलब्ध किसी भी अनुभाग में रिक्त बैड को भी मौसमी बीमारियों के रोगियों हेतु काम में लिया जाए। ।
जिला कलक्टर ने कहा है कि जिला मुख्यालय अथवा हायर सेंटर पर रोगी को अनावश्यक रैफर नहीं किया जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का न्यायसंगत उपयोग करते हुए आवश्यकता अनुसार ही रोगी को जिला मुख्यालय पर रैफर किया जाए। सभी चिकित्सा संस्थानों में मच्छररोधी वार्ड बनाए जाएं, जिसमें जालीदार दरवाजे व खिड़कियां हों। रोगियों का मच्छरदानीयुक्त बैड पर उपचार किया जाए। इस दौरान कोविड वैक्सीन से वंचित लोगों को चिन्हित कर उन्हें वैक्सीन के लिए प्रेरित कर वैक्सीन लगवाई जाए। जिले में स्थानीय निकायों के आयुक्त, अधिशाषी अधिकारी से समन्वय कर मच्छररोधी गतिविधियां संचालित की जाएं। सर्वे दलों द्वारा लक्षणों के आधार पर मौसमी बीमारियों की पहचान कर रोगी की जांच, उपचार एवं समुदाय में बचाव कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। एंटीलार्वा कार्यवाही के लिए पानी की टंकियों, कूलरों में लार्वा खत्म करवाने की कार्यवाही की जाए। पानी भरने के स्थानों पर जला हुआ तेल, गंबूसिया मछली डालने की कार्यवाही की जाए।

निर्देशों में कहा गया है कि बुखार, सर्दी, खांसी एवं उल्टी-दस्त आदि सामान्य मौसमी बीमारियों के लक्षणों के रोगियों को उपचार में काम आने वाली आवश्यक दवाओं की किट उपलब्ध कराई जाए। बुखार के प्रत्येक रोगी की ब्लड स्लाइड ली जाए। संभावित रोगी को उसकी मेडिकल स्थिति के अनुसार निदान के लिए निकटतम चिकित्सा संस्थान पर रैफर किया जाए। घर-घर सर्वे के दौरान दुकानदारों, डेयरी बूथ पर कार्यरत कार्मिक एवं सब्जी विक्रेताओं आदि की विशेष स्क्रीनिंग की जाए। हाईरिस्क ग्रुप से संबंधित गंभीर रोगियों को अविलंब सरकारी रैफरल ट्रांसपोर्ट के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुचांए जाने की व्यवस्था की जाए। किसी क्षेत्र विशेष में मरीजों की संख्या अधिक पाए जाने पर विशेष दल भेजकर सघन सर्वे, सेनेटाइजेशन, स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए। जिला एवं ब्लॉक स्तर पर इन गतिविधियों के लिए समुचित प्रशिक्षण आयोजित किए जाएं। घर-घर सर्वे के दौरान लोगों को हर रविवार, मलेरिया डेंगू पर वार अभियान, निकटतम चिकित्सा केंद्र पर परामर्श एवं उपचार लेने, घरों के आसपास पानी इकट्ठा नहीं होेने देने, टंकियों एवं कूलरों के पानी को प्रत्येक सात दिवस में खाली करने, मच्छरों से बचाव के लिए पूरे कपड़े पहनने, सभी स्तरों के अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्धता की जानकारी, भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचने, सामाजिक दूरी, मास्क के उपयोग एवं साबुन से नियमित तौर पर हाथ धोने, नियमित व्यायाम एवं योग करने, शराब एवं तंबाकू का सेवन नहीं करने, चीनी-नमक आदि का सेवन कम करने आदि के बारे में जानकारी दी जाए। जागरुकता सामग्री का वितरण किया जाए। जिला कलक्टर ने कहा है कि मौसमी बीमारी को देखते हुए किसी अधिकारी व कर्मचारी को विशेष परिस्थितियों के अलावा अवकाश अग्रिम आदेश तक देय नहीं होंगे।।

 

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