गर्भवती महिला एचआरसीटी जाँच बिना चिकित्सकीय परामर्श के नहीं करवाएँ : डॉ अनिता

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अलवर। गर्भवती महिलाओं में कोरोना के संक्रमण का खतरा उतना ही है जितना एक आम आदमी को होता है।लेकिन गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला की इम्यूनिटी कमजोर होती है वो खतरनाक स्थिती ​उत्पन्न कर सकती है। हालांकि गर्भवती से शिशु के संक्रमण सम्बन्धित कोई स्टडी अभी नही आई है। हालांकि शिशु के जन्म के बाद संक्रमित हो जाने का खतरा जरूर बढ जाता है । ये विचार एपेक्स रणथंभोर सेविका अस्पताल सवाईमाधोपुर की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिता मीना ने अलवर पुलिस की ओर से आयोजित ऑनलाइन सेशन श्रृंखला ”पूछे डॉक्टर से” के दौरान अलवर की जनता से रूबरू होते हुए व्यक्त किए। सत्र के दौरान उन्होने गर्भवती महिलाओं की सेहत और कोविड संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में चर्चा की और आमजन के सवालों के जवाब दिए।
रेड अलर्ट पखवाड़ा अवधि में कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत अलवर पुलिस, यूनिसेफ, राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग, सरदार पटेल पुलिस यूनिवर्सिटी, राजीविका – ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अलवर,एलएआरसी एवं संप्रीति संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में जारी ऑनलाइन चिकित्सक संवाद श्रंखला में पूछें डॉक्टर से के अंतर्गत वेबिनार अलवर पुलिस के अधिकृत सोशल मीडिया फेसबुक हैंडल व सुरक्षा संवाद श्रंखला के यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त इसका सीधा प्रसारण आरएससीपीसीआर, एसपीयूपी, जोधपुर पुलिस आदि के सोशल हैंडल्स पर भी किया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में डॉ. अनिता मीना ने बताया कि अगर गर्भवती महिला कोरोना संक्रमित हो जाए तो उसे खुद को आइसोलेट करते हुए चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक रूप से लेना चाहिए। कोवि​ड प्रोटोकॉल्स का कडाइ से पालन करना चाहिए। अपने खानपान और मेडिसिन का भी ध्यान रखना चाहिए।
डॉ. अनिता मीना ने बताया कि कुछ लोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही एचआरसीटी करवा रहे जो सही नहीं है, खासकर गर्भवती महिला की एचआरसीटी तो बिना चिकित्सकीय परामर्श के करवानी ही नहीं चाहिए क्योंकि उसके विकिरण से शिशु के विकास पर प्रभाव पड सकता है।कोविड सं​कमित हो जाने की स्थिति में अगर चिकित्सक सलाह दे तभी प्रोपर शील्डिंग के साथ ही एचआरसीटी करवाई जानी चाहिए।गर्भवती महिला की डाइट के बारे में बताते हुए उन्होने कहा कि गर्भावस्था में डाइट का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। दाले, पनीर प्रोटीन की अधिकता वाली डाइट लेनी चाहिए, विटामिन सी वाले फल जैसे संतरा, मौसमी नींबू आदि का सेवन करना चाहिए। शरीर के हाइड्रेशन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए । प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूरी रूप से लेना ही चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान एल्कोहल के प्रयोग के बारे मे पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होने बताया कि एल्कोहल इनटेक करना खतरनाक होता है जबकि हैंड सेनेटाइजर के प्रयोग से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होने कहा कि जंहा तक संभव हो साबुन और साफ पानी से अपने हाथों को साफ किया जाना चाहिए लेकिन अगर उपलब्ध ना हो तो हैण्ड सेनेटाइजर या हैंड रब का प्रयोग भी सेफ हैडॉ. अनिता मीना ने कहा कि कोरोना संक्रमित महिलाएं अपने बेबी का ब्रेस्ट फीड करवा सकती है लेकिन उसके लिए गाइडलाइन बनीं है जिसकी पालना जरूरी है।बेबी को फीडिंग से पहले मां को अपने हाथों व ब्रेस्ट को सेनेटाइज करना चाहिए साथ ही प्रोपर मास्क पहना होना चाहिए अगर बच्चे को पंप की सहायता से दूघ निकाल कर भी दे रहें है तो भी सावधानी जरूरी है।
गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली दवाओं के प्रति भ्रांतियों को दूर करते हुए डॉ. अनिता ने बताया कि फोलिक ऐसिड बच्चें के न्यूरोलॉजिकल डवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी है। गर्भवती महिला के शरीर से शिशु तो पेाषण ले लेता है लेकिन माता के शरीर में आयरन केलिश्यम आदि की कमी होने लगती है। हालांकि हैल्दी डाइट से उसकी पूर्ति भी गर्भवती के शरीर को होती है लेकिन फिर भी ये दवाईया गर्भवती को लेनी चाहिए ताकि शिशु का विकास सही तरीके से हो। गर्भावस्था के दौरान कोविड संक्रमित हो जाने पर महिला के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी क्या शिशु के शरीर में भी बनने लगती है का जवाब देते हुए डॉ. अनिता ने कहा इस पर अभी कोई स्टडी नहीं है कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। मां के दूध से कोविड में फायदा मिलेगा या नही ये अभी रिसर्च का विषय है लेकिन मां के दूध से शिशु का अन्य बहुत सी बिमारियों से लडने की क्षमता मिलती है। उन्होने कहा कि कोविड संक्रमित गर्भवती की डिलिवरी सिजेरियन ही हो ये जरूरी नही है।अगर पेशेंट की स्थिति ज्यादा खराब नहीं है तो नॉर्मल डिलिवरी भी हो सकती है।विशेष परिस्थिति में ही सिजेरियन करनी पडती है।फाइब्रोइड के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. अनिता ने कहा कि हार्मोनल प्रभाव के चलते बच्चेदानी में गांठ बन जाती है जिसे फाइब्रोईड कहते है। ये नेचुरल प्रोसेस है जब तक महावारी आती है ये बनते है। फाइब्रोईड अगर सिम्टोमेटिक नही है तो जरूरी नही है कि उसे निकलवाया ही जाए लेकिन अगर उसके चलते कोई परेशानी हो रही है जैसे अनियमित माहवारी, माहवारी के दौरा बहुत तेज ब्लीडिंग तो डॉक्टर की सलाह से आगे का ट्रीटमेंट डिसाइड कर सकते है।एक सवाल के जवाब में डॉ. अनिता ने बताया कि आम भाषा में गोला डिगने की समस्या से निजात पाने के लिए चिकित्सकीय परामर्श ही लेना चाहिए। कुछ महिलाए पेट मसलने जैसे घरेलू नुस्खों से इलाज करवाती है जो उचित नहीं है। गर्भवती महिलाओं को स्टोराइड लेने से बचना चाहिए। चिकित्सकीय परामर्श के चलते अगर स्टोराइड लेना पड रहा है तो चिकित्सक डिसाइड करते है कि कितनी मात्रा में देना है। हालांकि इसके प्रभाव से शुगर का लेवल बढ जाता है लेकिन वो टेम्प्रेरी होता है जिसकी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है।

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