राज्य सरकार प्रदेश की ऎतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए कृत संकल्पित — राजेन्द्र राठौड़

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चितौडगढ़। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि राज्य सरकार, प्रदेश की ऎतिहासिक धरोहर के विकास व संरक्षण के लिये कृत संकल्पित हैं। राठौड़ शुक्रवार को चितौड़गढ़ में जौहर स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित ‘‘जौहर श्रद्धांजली’’ समारोह में मुख्य अतिथि के पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ का इतिहास प्रदेश में गौरव पूर्ण है। यहां के दुर्ग के आगोश में वीरता की गौरव पूर्ण कहानियां छिपी है। गढ़ के विकास के लिए वर्तमान में यहां ऑडिटोरियम बनाने का कार्य चल रहा है। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि विश्व का इतिहास राजपूताना के इतिहास बिना अधूरा है। आज लोकतंत्र है और कलम उठाने का युग है। हमें राजस्थान का गौरव व मान-मर्यादा को बचाने के लिए सबको साथ-साथ चलना होगा। दुर्ग संरक्षण के लिए वर्तमान सरकार ने आसपास चल रहें खनन कार्य को बंद करा दिया हैं। इससे पूर्व राठौड़ ने रानीपद्मिनी के जौहर स्थल पर पहुंचकर जौहर सती देवियों के चित्र को अपनी श्रद्धांजली दी एवं किये जा रहे हवन में अपनी आहूति भी दी।
इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनोर ने अध्यक्षता पद से बोलते हुए कहा कि भारत के इतिहास में मेवाड़ का स्थान सर्वोपरि है।
चित्तौड़गढ़ लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सदस्य सी.पी. जोशी ने कहा कि आज पूरे विश्व में मेवाड़ की गौरव गाथा के साथ गढ़ चित्तौड़गढ़ विशेष रूप से जाना जाता है। चित्तौड़गढ़ एक वीर भूमि है यहां कि महत्ता को मानकर केन्द्र सरकार ने उनके प्रयासों से शौर्यमणि महाराणा प्रताप टिकिट जारी किया हैं। इसी प्रकार मेवाड़ एक्सप्रेस को वीर भूमि चित्तौड़गढ़ के नामकरण व गढ़ के विकास के लिए सरकार ने इसे हैरिटेज में शामिल कर साढ़े ग्यारह करोड़ की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने बताया कि मेवाड़ के इतिहास की जानकारी एवं गौरव को दर्शाने के लिए शहर के पास रिठोला चौराहा के आसपास महाराणा प्रताप की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने के प्रयाय किये जा रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या ने गढ़ चित्तौड़गढ़ के विकास में पूरा योगदान देने को कहा।
प्रारम्भ में जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष महंत उम्मेद सिंह धोली ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया एवं जानकारी दी कि वर्ष 1303 में रानी पद्मिनी के जौहर के सहित यहां तीन जौहर हुए हैं उनकी स्मृति में उनके स्वाभिमान व गौरव की याद दिलाने के लिये प्रतिवर्ष यह आयोजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि सभी बलिदानों में मुख्य रूप से जौहर का बलिदान सर्वश्रेष्ठ है। इन्होंने युवाओं का आवहन किया कि आज का दौर शिक्षा का दौर है। इस श्रेत्र में उन्हें अपने कलम की प्रतिभा दिखाना चाहिए।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री एवं सांसद सी.पी. जोशी ने भक्त शिरोमणी मीरा पुरस्कार के रूप में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह् प्रदान किये।
समारोह में लोकेन्द्र सिंह काल्वी, विश्वराज सिंह मेवाड़ एवं पुष्कर के महंत नाथ गौशाला महाराज समता राम ने भी संबोधित किया।

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