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झुंझुनूं में सियासत का नया चेहरा: 30 युवा मैदान में, 24 ने चुना निर्दलीय रास्ता

पार्टियों ने सिर्फ 6 “जेन-जी” चेहरों पर जताया भरोसा, टिकट से ज्यादा युवाओं में चुनाव लड़ने का जुनून; 21 से 30 साल के प्रत्याशी बदलेंगे नगर परिषद चुनाव का रंग

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
नगर परिषद चुनाव में इस बार सियासत की तस्वीर में नई पीढ़ी की दस्तक साफ दिखाई दे रही है। 60 वार्डों की चुनावी जंग में 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 युवा प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें सबसे खास बात यह है कि प्रमुख राजनीतिक दलों से टिकट पाने वाले युवाओं की संख्या महज 6 है, जबकि करीब 24 युवाओं ने निर्दलीय या अन्य विकल्प के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक राह खुद बनाने का फैसला किया है। यानी पार्टी के टिकट का इंतजार करने के बजाय नई पीढ़ी सीधे जनता के बीच पहुंच रही है। सोशल मीडिया से लेकर वार्ड की गलियों तक सक्रिय यह “जेन-जी” अब सिर्फ राजनीति पर टिप्पणी नहीं कर रही, बल्कि खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। युवाओं के मुद्दे, नए विचार, बदलाव और स्थानीय समस्याओं को लेकर किए जा रहे दावे इस चुनाव में पुराने राजनीतिक समीकरणों के बीच नई बहस खड़ी कर रहे हैं।

टिकट में दलों का भरोसा सीमित, निर्दलीयों में सबसे ज्यादा जोश

उपलब्ध प्रत्याशी सूची के अनुसार करीब 30 युवा उम्मीदवारों में कांग्रेस के 2, भाजपा के 2 और कम्युनिस्ट पार्टी के 2 प्रत्याशी शामिल हैं। इसके मुकाबले बड़ी संख्या में युवा निर्दलीय अथवा अन्य विकल्पों के साथ मैदान में हैं। यह तस्वीर बताती है कि राजनीतिक दलों ने जहां युवा चेहरों को सीमित अवसर दिया, वहीं युवाओं ने चुनाव से पीछे हटने के बजाय अपनी ताकत पर जनता के बीच जाने का रास्ता चुना। नगर परिषद के कई वार्डों में युवा प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। कुछ वार्डों में एक ही आयु वर्ग के दो या उससे अधिक प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में इन वार्डों में मुकाबला केवल पार्टी बनाम पार्टी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के चेहरों और उनकी व्यक्तिगत पकड़ के बीच भी दिखाई देगा।

21 साल का अभय सबसे कम उम्र का दावेदार

युवा प्रत्याशियों की सूची में वार्ड 56 के अभय गौड़ 21 वर्ष की उम्र के साथ सबसे कम उम्र के उम्मीदवार हैं। वहीं वार्ड 57 के मयंक सैनी 22 वर्ष के हैं। दोनों की उम्र इस बात का संकेत है कि नगर परिषद की राजनीति में प्रवेश की उम्र अब काफी कम हो रही है।

अब नजर वोटर पर: युवा चेहरों को कितना मिलेगा मौका

नगर परिषद चुनाव में युवाओं की यह मौजूदगी महज संख्या नहीं, बल्कि बदलती स्थानीय राजनीति का संकेत भी मानी जा सकती है। हालांकि चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि “जेन-जी” की यह चुनावी एंट्री कितनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करती है। फिलहाल इतना तय है कि झुंझुनूं के वार्डों में इस बार अनुभव के साथ जोश, सोशल मीडिया और नई सोच भी चुनावी मुकाबले का हिस्सा बनने जा रही है।

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