बीडीके अस्पताल के पालना गृह में मिला था मासूम, इटली के दंपती ने अपनाया, बोले—अब हमारा परिवार पूरा हुआ
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
झुंझुनूं से एक ऐसी कहानी सामने आई है। जो सिर्फ खबर नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल है। एक मासूम, जिसे जन्म के बाद अपनों ने छोड़ दिया था। आज वही बच्चा सात समंदर पार अपना परिवार पा चुका है। एक ऐसा परिवार… जिसने स्पेशल नीड वाले बच्चे को अपनाकर दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है। जिला मुख्यालय के राजकीय जिला बीडीके अस्पताल के पालना गृह में मिला एक नन्हा जीवन। जिसे जन्म के कुछ ही समय बाद बेसहारा छोड़ दिया गया था। करीब डेढ़ साल पहले मिले इस मासूम का जन्म प्री-मैच्योर हुआ था और उसके दिल में छेद जैसी गंभीर समस्या भी थी। जिंदगी की शुरुआत ही संघर्ष से हुई। करीब एक महीने तक अस्पताल में इलाज चला। इसके बाद जयपुर में भी विशेष उपचार किया गया। फिर इस बच्चे को राजकीय शिशु गृह में लाया गया। जहां उसकी देखभाल, पोषण और पूरा टीकाकरण सुनिश्चित किया गया। राजकीय शिशु गृह, झुंझुनूं में इस बच्चे को सिर्फ आश्रय ही नहीं मिला। बल्कि एक नई उम्मीद भी मिली। यहां लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी गई और उसे एक बेहतर भविष्य देने की दिशा में प्रयास जारी रहे। कहते हैं… रिश्ते खून से नहीं, एहसास से बनते हैं। और इस कहानी ने इसे सच कर दिखाया है। जहां अपने भी साथ छोड़ देते हैं। वहीं इटली से आए एक दंपती ने इस “स्पेशल नीड” बच्चे को अपनाने का साहसिक और संवेदनशील फैसला लिया। पिछले तीन-चार महीनों से गोद लेने की पूरी प्रक्रिया चल रही थी। जो सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स आथिरिटी (कारा) के माध्यम से पूरी हुई। सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद अब वो भावुक पल आया। जब दंपती ने पहली बार बच्चे को अपनी गोद में लिया। गोद लेने वाले पिता डेनिएले फ्राटिनी ने बताया कि वे इटली के फ्लोरेंस टस्कनी में रहते है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक संस्थान में इमेजिंग सर्विस असिस्टेंट के रूप में काम करते है। उनकी मुलाकात 2013 में मार्गरीटा से हुई थी। जिसके बाद 2017 में दोनों ने शादी की। उन्होंने कहा कि बच्चा मिला है। यह हमारे लिए बहुत ही खास पल है। वे कई सालों से इस अडॉप्शन का इंतजार कर रहे थे। अब डेनिएले फ्राटिनी व उनकी पत्नी मार्गरीटा को लगता है कि उनका परिवार पूरा हो गया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे बच्चे को बहुत प्यार से बड़ा करेंगे और उसकी पूरी कहानी उसे बताएंगे। इटली से आए इस दंपत्ति के लिए यह सिर्फ अडॉप्शन नहीं। बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है। अब यह मासूम इटली जाकर अपने नए परिवार के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करेगा। जहां उसे मिलेगा—प्यार, शिक्षा और एक सुरक्षित भविष्य।
मां भी कोलकाता से अडॉप्टेड
कारा के साथ मिलकर काम कर रहे और इटेलियन एजेंसी के प्रतिनिधि जमाल मुर्शीद ने बताया कि वे एक सहयोगी के रूप में काम करते है। कारा और इटेलियन एजेंसी प्रोफाइल और डॉक्यूमेंट्स देखकर पेरेंट्स को अप्रुव करते है। फिर स्पेशल नीड बच्चों के लिए मेचिंग की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया CARA के माध्यम से होती है। जमाल मुर्शीद ने बताया कि वे भारत में फोरेन एजेंसी के प्रतिनिधि हैं और बच्चे को इटली लेकर जाएंगे। यह बहुत ही इमोशनल मूमेंट है और परिवार बेहद खुश है। खास बात यह है कि अडॉप्ट करने वाली डेनिएले फ्राटिनी की पत्नी मार्गरीटा भी सालों पहले कोलकाता से अडॉप्ट की गई थी। ऐसे में एक अडॉप्ट मां ही इस बच्चे को अपनी ममता के साथ पालेगी।
अधीक्षक की अपील, पालना गृह में छोड़ें, सरेंडर भी एक विकल्प
शिशु गृह प्रशासन के अनुसार ऐसे स्पेशल नीड बच्चों को अक्सर विदेशी दंपती ही अपनाते हैं। यहां बच्चों की नियमित देखभाल के साथ उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी तैयार की जाती है। अधीक्षक अंकित कुमार की मानें तो उनका उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा बेसहारा न रहे। अगर कोई पालन-पोषण नहीं कर सकता तो पालना गृह में सुरक्षित छोड़ सकता है। ताकि बच्चे को एक बेहतर भविष्य मिल सके। आज तक यहां से गए बच्चे अच्छे परिवारों में हैं और अच्छी तरह से बढ़ रहे हैं। यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी झुंझुनूं से बच्चे विदेशों में गोद लिए जा चुके हैं। एक बच्चा स्पेन और एक बच्ची अमेरिका तक पहुंच चुकी है। जिस बच्चे के पास कभी अपना कहने को कोई नहीं था। आज उसके पास एक पूरा परिवार है। एक ऐसा परिवार, जो उसकी हर धड़कन का ख्याल रखने को तैयार है। यह कहानी सिर्फ अडॉप्शन की नहीं, बल्कि इंसानियत, उम्मीद और नए जीवन की है। एक मासूम को नया जीवन देने वाली ये कहानी, समाज को यह संदेश देती है कि— अगर हम चाहें… तो किसी की पूरी दुनिया बदल सकते हैं।
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