भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में देशभर से जुटीं हजारों महिलाएं, कृषि, पशुपालन, जैविक खेती और महिला किसानों के स्वावलंबन पर हुआ मंथन
नई दिल्ली। पाली । प्रहलाद सिंह चारण
भारतीय किसान संघ की ओर से बुधवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। देश के विभिन्न राज्यों और गांवों से पहुंचीं हजारों महिला किसानों की सहभागिता से स्टेडियम उत्साह और उमंग से भर उठा। ‘हम भारत की नारियां वैभव लायेंगी’ के उद्घोष के बीच सम्मेलन का शुभारंभ गौ-पूजन, भगवान बलराम पूजन और ध्वजारोहण के साथ हुआ। सम्मेलन में महिला किसानों की भूमिका, कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी, जैविक खेती, पशुपालन, बीज संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को पहचान दिलाने पर जोर दिया।
नारी शक्ति सृजन और संवर्धन की प्रतीक : प्रो. विमला डूंकवाल
उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि एवं कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डूंकवाल ने कहा कि भारतीय नारी में सृजन और संवर्धन की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने नारी को अन्नपूर्णा और दुर्गा का स्वरूप बताते हुए कहा कि वह अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहती है।उन्होंने महिला किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए कृषि और समाज के विकास में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
महिला किसानों की पारंपरिक छवि बदलने की जरूरत : मंजू दीक्षित
अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने सम्मेलन की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश में महिला किसानों की पारंपरिक तस्वीर को बदलने की आवश्यकता है। आज महिलाएं नई तकनीक, नवाचार और ऊर्जा के साथ खेती-किसानी में योगदान दे रही हैं। वे परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।उन्होंने महिला किसानों की क्षमता, मेहनत और उपलब्धियों को व्यापक पहचान दिलाने पर जोर दिया।इस सत्र में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई और मंत्री वीना सतीश ने भी विचार व्यक्त किए।
विकसित भारत के लिए गौ-आधारित कृषि और जैविक खेती पर जोर
समापन सत्र में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए गौ-आधारित कृषि, वाणिज्य और जैविक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और पौष्टिक आहार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनाने का आह्वान किया।अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि स्वावलंबी और आत्मनिर्भर महिला किसानों को उचित प्रतिष्ठा मिलने से गांव, समाज और परिवार का गौरव बढ़ेगा। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल तथा राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख रितु शर्मा सहित भारतीय किसान संघ के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसान सम्मानित
सम्मेलन में देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों के आधार पर कृषि एवं ग्रामीण आजीविका के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया।
- गौ-कृषि-वाणिज्यम्: सुनंदा सायसिंग (महाराष्ट्र)
- जैविक कृषि: दीपाली ओरांव (पश्चिम बंगाल)
- बीज संरक्षण: कमला बेन (गुजरात)
- पशुपालन: अंबा कालिंधी एवं पंपा गराई (पश्चिम बंगाल)
- रोजगार सृजन: पुष्पा सिंह (बिहार)
- खाद्य प्रसंस्करण: माया सिन्हा महापात्रा (ओडिशा), सुलता चटर्जी एवं शुक्ला बैरागी (पश्चिम बंगाल)
- सम्मान समारोह के दौरान महिला किसानों के कार्यों और उनके अनुभवों को साझा किया गया।
पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति ने मोहा मन
सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से आई महिला किसान अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं। विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत लोकगीतों और सांस्कृतिक नृत्यों ने कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित किया।स्टेडियम में अलग-अलग राज्यों की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों का संगम देखने को मिला। आयोजन में ‘विविधता में एकता’ की झलक दिखाई दी।
अपने खर्च पर दिल्ली पहुंचीं महिला किसान
सम्मेलन की एक विशेष बात यह रही कि इसमें शामिल होने के लिए अनेक महिला किसान अपने स्वयं के टिकट और खर्च पर दिल्ली पहुंचीं। विभिन्न सत्रों में उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों, खेती की लागत, महिला किसानों की समस्याओं और ग्रामीण आजीविका जैसे मुद्दों पर चर्चा की।महिला किसानों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। सम्मेलन में महिला किसानों के अनुभवों, उनकी उपलब्धियों और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को प्रमुखता से सामने रखा गया।













