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झुंझुनूं नगर परिषद सभापति: कांग्रेस 30, भाजपा 15; 21 सितंबर को फैसला

झुंझुनूं नगर परिषद सभापति चुनाव में कांग्रेस भाजपा और निर्दलीय पार्षदों का सियासी गणित

झुंझुनूं नगर परिषद में सभापति की कुर्सी का सियासी गणित: कांग्रेस 30 पर, भाजपा 15 पर; भाजपा को अब 16 पार्षदों के समर्थन की तलाश

कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान के प्रस्तावक बने निर्दलीय वीरेंद्र डारा, कांग्रेस को बहुमत के लिए एक का सहारा चाहिए; भाजपा ने मनु धनकड़ को उतारकर शुरू किया समर्थन जुटाने का प्रयास

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़

नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अब झुंझुनूं की शहरी सरकार की कमान किसके हाथ होगी, इसको लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 60 वार्ड वाली नगर परिषद में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि भाजपा के 15 और निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में 15 सीटें आई हैं। सभापति चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 31 है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से महज एक पार्षद दूर है, जबकि भाजपा को अपने 15 पार्षदों के अलावा 16 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। सभापति पद के लिए कांग्रेस ने वार्ड 41 से निर्वाचित अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान और भाजपा ने वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनकड़ को मैदान में उतारा है। दोनों ने नामांकन दाखिल कर दिया है। सभापति का चुनाव 21 सितंबर को होना है।

अब्दुल्ला के प्रस्तावक बने वीरेंद्र डारा, बढ़ी राजनीतिक हलचल

कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला अगवान के नामांकन में निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा का प्रस्तावक बनना इस चुनाव का महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। डारा वार्ड 9 से निर्दलीय निर्वाचित हुए हैं और चुनाव से पहले भी सभापति पद की संभावित दावेदारी को लेकर उनका नाम चर्चा में रहा था। कांग्रेस खेमे की ओर से कुछ निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि इन दावों के बावजूद अंतिम संख्या सभापति चुनाव में होने वाले वास्तविक मतदान से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल 30 कांग्रेस पार्षदों के सामने बहुमत का आंकड़ा 31 होने से मुकाबले का गणित बेहद सीधा है—कांग्रेस को एक अतिरिक्त समर्थन चाहिए।

भाजपा ने कम संख्या बल के बावजूद उतारा मनु धनकड़ को

भाजपा के पास 15 पार्षद हैं, ऐसे में भाजपा के सामने कांग्रेस की तुलना में काफी कम संख्या-गणित है। इसके बावजूद भाजपा ने वार्ड 49 से जीते मनु धनकड़ को सभापति पद का उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को औपचारिक रूप से दोतरफा कर दिया है। अब भाजपा की रणनीति का बड़ा हिस्सा निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने और 16 अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर केंद्रित है । चुनाव के बाद से दोनों प्रमुख दलों की ओर से पार्षदों को अपने-अपने खेमे में बनाए रखने और समर्थन जुटाने की राजनीतिक कवायद की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रहेगी।

अब्दुल्ला अगवान: लगातार दूसरी जीत के बाद सभापति की दावेदारी

वार्ड 41 से कांग्रेस के टिकट पर जीते अब्दुल्ला अगवान ने 2026 के चुनाव में 1,003 वोट हासिल किए और निर्दलीय प्रत्याशी अबरार अहमद को 734 वोटों से पराजित किया। वे लगातार दूसरी बार कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। अब्दुल्ला ने 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इसके बाद कांग्रेस से जुड़े और 2019 में कांग्रेस ने उन्हें वार्ड 41 से प्रत्याशी बनाया। जीत के बाद पार्टी ने 2026 में भी उन पर भरोसा जताया और उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। स्थानीय कांग्रेस राजनीति में उन्हें सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला के करीबी नेताओं में गिना जाता है—यह स्थानीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है।

मनु धनकड़: पहली चुनावी पारी में जीत, अब सभापति की दावेदारी

भाजपा प्रत्याशी मनु धनकड़ ने पहली बार नगर परिषद चुनाव लड़ा और वार्ड 49 से 651 वोट लेकर निर्दलीय डॉ. कमलचंद सैनी को 400 वोटों से हराया। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट मनु धनकड़ झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू के दामाद हैं। चुनाव के दौरान यह पारिवारिक संबंध भी स्थानीय राजनीतिक चर्चा में रहा। मनु धनकड़ ने कहा कि वास्तविक तस्वीर चुनाव की आगामी प्रक्रिया में स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पार्षद को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता है और पार्षद अपने विवेक के अनुसार मतदान करेंगे।

अब 21 सितंबर पर निगाहें

झुंझुनूं नगर परिषद का मौजूदा गणित कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीयों के 15 पार्षदों का है। इसलिए सभापति चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। कांग्रेस को जहां बहुमत के लिए केवल एक अतिरिक्त समर्थन चाहिए, वहीं भाजपा 16 पार्षदों का समर्थन जुटाने के प्रयास में है। अंतिम फैसला 21 सितंबर को पार्षदों के मतदान और आधिकारिक परिणाम से होगा।

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