महिला थाना पुलिस, सखी सेंटर और परामर्श केंद्र की तीन माह की काउंसलिंग लाई रंग; तीन साल के बच्चे को फिर मिला मां और पिता दोनों का साथ
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चूरू। कभी पक्के मकान का सपना, कभी आर्थिक मजबूरी और कभी नौकरी को लेकर बनी असहमति ने एक छोटे से परिवार के बीच ऐसी दूरी पैदा कर दी कि पति-पत्नी करीब ढाई साल तक अलग-अलग रहने लगे। लेकिन लगातार बातचीत, समझाइश और काउंसलिंग के बाद अब यह परिवार फिर से एक हो गया है। महिला थाना पुलिस, सखी सेंटर और परामर्श केंद्र के संयुक्त प्रयासों से पति-पत्नी ने पुराने मतभेद पीछे छोड़कर साथ रहने का फैसला किया।देपालसर रोड स्थित झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले अजीत और सुलोचना का विवाह करीब चार वर्ष पहले हुआ था। दोनों का तीन साल का एक बेटा भी है। परिवार की जिंदगी सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन घरेलू परिस्थितियों और भविष्य को लेकर दोनों के विचारों में अंतर बढ़ता गया।

एक का सपना था पक्का घर, दूसरे की चिंता थी आर्थिक मजबूरी
सुलोचना चाहती थी कि झुग्गी की जगह उनका अपना पक्का मकान हो। अजीत आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इस बात को आगे टालता रहा। सुलोचना का मानना था कि यदि दोनों मिलकर कमाएंगे तो परिवार के लिए पक्का मकान बनाना आसान होगा।इसी सोच के चलते सुलोचना अपनी बहन के साथ काम पर जाने लगी। लेकिन अजीत पत्नी के नौकरी करने के पक्ष में नहीं था। दोनों के बीच इसी बात को लेकर मनमुटाव बढ़ता गया और छोटी-छोटी बातें धीरे-धीरे बड़े विवाद में बदल गईं।
रास्ते अलग हुए, परिवार बिखर गया
विवाद बढ़ने के बाद अजीत रोजगार की तलाश में आसाम चला गया, जबकि सुलोचना अपनी बहन के घर चली गई। बाद में वह अपने पीहर हनुमानगढ़ पहुंच गई। इस तरह पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ती चली गई और करीब ढाई साल तक दोनों अलग रहे।मामला पुलिस तक पहुंचा तो परिवार की परिस्थितियां और संवेदनशील हो गईं। परिवार में पुलिस के हस्तक्षेप को सहज नहीं माना जा रहा था। ऐसे में महिला थाना थानाधिकारी कुसुमलता ने परिस्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए मामले को महिला अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित परामर्श केंद्र और सखी सेंटर भेजने का निर्णय लिया।
तीन महीने तक चली समझाइश, फिर पिघली रिश्तों की दूरी
परामर्श केंद्र और सखी सेंटर में दोनों पक्षों से बातचीत की गई। एक-दूसरे की भावनाओं और परेशानियों को समझने का अवसर दिया गया। एक-दो बातचीत में बात नहीं बनी, लेकिन लगातार करीब तीन महीने तक काउंसलिंग और समझाइश का दौर चलता रहा।धीरे-धीरे दोनों के बीच संवाद बढ़ा और पुराने मतभेदों पर नए सिरे से बात हुई। आखिरकार सुलोचना और अजीत ने एक साथ रहने के लिए सहमति जताई।
महीनों से बंद घर का ताला खुला तो लौट आई परिवार की खुशी
आज थानाधिकारी कुसुमलता, सखी सेंटर की नीजर कंवर तथा अन्य काउंसलर्स की मौजूदगी में महीनों से बंद पड़ी झुग्गी का ताला खुलवाया गया। जिस घर में लंबे समय से सन्नाटा पसरा था, उसमें फिर से परिवार के साथ रहने की उम्मीद लौट आई।इस सुलह की सबसे बड़ी खुशी परिवार के उस तीन साल के बच्चे के हिस्से में आई, जो अब तक मां के साथ रह रहा था। अब उसे मां के साथ पिता का प्यार और साथ भी मिलेगा। परिवार के अन्य सदस्य भी दंपती के दोबारा साथ आने से बेहद खुश नजर आए।

सुलोचना बोली—‘अपने घर लौटकर खुश हूं’
सुलोचना ने कहा कि मैं अपने घर आकर खुश हूं और अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूं।वहीं अजीत ने भी अपनी पत्नी की भावनाओं को समझने और उनका सम्मान करने की बात कही। उसका कहना है कि वह कड़ी मेहनत करेगा और पत्नी की इच्छाओं को पूरा करने का हरसंभव प्रयास करेगा।
यह सिर्फ सुलह नहीं, एक बच्चे के बचपन की भी वापसी है
इस पूरे मामले की सबसे भावुक तस्वीर यही रही कि जिस परिवार में पति-पत्नी की दूरी के कारण एक छोटा बच्चा मां के साथ रह रहा था, वहां अब उसे फिर माता-पिता दोनों का साथ मिलेगा।यह मामला इस बात की मिसाल भी है कि हर पारिवारिक विवाद का अंत रिश्ते टूटने पर नहीं होता। कई बार जरूरत होती है—एक-दूसरे को सुनने की, अपनी बात समझाने की और रिश्ते को एक आखिरी मौका देने की।महिला थाना पुलिस, सखी सेंटर और परामर्श केंद्र के प्रयासों ने इस परिवार को केवल समझौते तक नहीं पहुंचाया, बल्कि उसे दोबारा साथ रहने का अवसर दिया। ढाई साल से बंद पड़े घर का ताला खुलना इस परिवार के लिए महज एक दरवाजा खुलना नहीं, बल्कि रिश्तों में फिर से लौटे भरोसे और उम्मीद का प्रतीक बन गया।














