सांसद बृजेंद्र सिंह ओला बोले—सिर्फ कौशल प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र नहीं, युवाओं को रोजगार की गारंटी भी दे सरकार
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झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में प्रमुखता से उठा। झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से केंद्र सरकार से जिले में संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रशिक्षित युवाओं की संख्या और प्रशिक्षण के बाद उन्हें मिले रोजगार का विस्तृत ब्यौरा मांगा। सांसद ओला ने सरकार से पूछा कि झुंझुनूं जिले में कितने युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया, कौन-कौन से कार्यक्रम संचालित किए गए और इन प्रशिक्षणों के बाद कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कितने प्रशिक्षित युवाओं को स्थानीय उद्योगों में नौकरी मिली तथा कितने युवा स्वरोजगार से जुड़े। सांसद ओला ने कहा कि सरकार की ओर से लोकसभा में झुंझुनूं जिले से संबंधित स्पष्ट जिला-वार आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए गए। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप स्वीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उनसे जुड़े रोजगार के परिणामों का भी स्पष्ट ब्यौरा सामने नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्रशिक्षण प्राप्त उम्मीदवारों को अधिक नियुक्तियां देने की बात कही गई है, लेकिन सवाल यह है कि इन नियुक्तियों की प्रक्रिया कब पूरी होगी और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार कब मिलेगा।
स्थानीय रोजगार की जरूरतों से जोड़ी जाए कौशल योजना
सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने सरकार से मांग की कि झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र के लिए जिला-विशिष्ट कौशल विकास योजना तैयार की जाए। इसमें क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों और रोजगार की वास्तविक संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण को स्थानीय उद्योगों, कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, एमएसएमई तथा खेल क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ा जाना चाहिए। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार, स्थानीय स्तर पर प्लेसमेंट और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था भी होनी चाहिए।
‘प्रमाण-पत्र नहीं, रोजगार है असली सफलता’
सांसद ओला ने कहा कि केवल प्रशिक्षण देना और प्रमाण-पत्र वितरित कर देना कौशल विकास की सफलता नहीं है। असली सफलता तब होगी, जब प्रशिक्षण प्राप्त युवा को उसकी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिले, उसकी आय में वृद्धि हो और वह अपने क्षेत्र में सम्मानजनक एवं स्थायी आजीविका हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार और प्लेसमेंट तक की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। कौशल विकास योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना होना चाहिए।
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