शिक्षकों की समस्याओं और एससी-एसटी विद्यार्थियों की सहायता पर बनी रणनीति

राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर की जिला बैठक में पे-प्रोटेक्शन, इंटर्नशिप, काउंसलिंग व गैर-शैक्षणिक कार्यों पर मंथन

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हनुमानगढ़।हिमांशु मिड्ढा
गुरु श्री रविदास जी महाराज गुरुघर, हनुमानगढ़ जंक्शन में राजस्थान शिक्षक संघ (अंबेडकर) की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष दीपक बारोटिया ने की। बैठक में शिक्षक, शिक्षार्थी एवं शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार तक मांगें पहुंचाने का निर्णय लिया गया।बैठक में संगठन द्वारा एससी-एसटी वर्ग के जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता देने की पहल की जानकारी दी गई। संगठन ने गत वर्ष लिए निर्णय के तहत पिछले सत्र में सहायता राशि जारी की थी। इस सत्र में भी जरूरतमंद अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए हैं। विद्यार्थी अपना आवेदन जिला कोषाध्यक्ष प्रेमाराम मेहरड़ा को दे सकते हैं।प्रथम सत्र में संगठन की सदस्यता बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई। जिला कार्यकारिणी में कर्ण सिंह चौहान को संयुक्त मंत्री, निरंजन प्रकाश चोपड़ा को उपाध्यक्ष तथा हनुमान प्रसाद को प्राथमिक शिक्षा प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।दूसरे सत्र में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई। पे-प्रोटेक्शन विसंगति पर संगठन ने मांग की कि पूर्व संस्था से जारी अंतिम भुगतान प्रमाण-पत्र (एलपीसी) को ही ऑप्शन फॉर्म के रूप में स्वीकार करते हुए शिक्षकों पर लगाए गए आपत्तियों को हटाया जाए। बीएड इंटर्नशिप के दौरान शिक्षकों के वेतन में कटौती को अनुचित बताते हुए राजस्थान सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन कर राहत देने की मांग की गई।पदस्थापन प्रक्रिया में ऑनलाइन काउंसलिंग के स्थान पर पारदर्शी ऑफलाइन काउंसलिंग लागू करने, डीपीसी के बाद शीघ्र पदस्थापन करने तथा काउंसलिंग में एससी-एसटी रोस्टर लागू करने की मांग भी उठी। वक्ताओं ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों और प्रतिनियुक्तियों से मुक्त रखने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षक का मुख्य दायित्व विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना है।बैठक में बीएलओ कार्य में शिक्षकों की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई गई। संगठन ने मांग की कि वर्षभर चलने वाली बीएलओ गतिविधियों के लिए चुनाव शाखा द्वारा स्थायी बीएलओ नियुक्त किए जाएं, ताकि विद्यालयी शिक्षा प्रभावित न हो। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों को दी जाने वाली पुनर्भरण राशि के प्रावधान, क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याता एवं अन्य आवश्यक पदों के सृजन तथा हालिया स्थानांतरणों में परिवेदनाओं के निस्तारण में पारदर्शिता की मांग भी की गई।वक्ताओं ने मोबाइल व सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट नियमावली बनाने तथा फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमैरेसी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए शिक्षक का विद्यालय में रहना, बच्चों का नियमित विद्यालय आना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है।बैठक में जिला कोषाध्यक्ष प्रेमाराम मेहरड़ा, महामंत्री राकेश शकरवाल, पूनमचंद सांखला, राजेंद्र मंडिया, निरंजन चोपड़ा, दलीप कुमार बरोड़, अमरचंद घारू, रोशनलाल, दुलीचंद, हनुमानप्रसाद, मोहनलाल जिनागल, अजय सागर, बेगराज सुनिया, प्रेम कुमार मोची, मदनलाल रेगर, भोपाल सिंह मेहरड़ा सहित अनेक पदाधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे। सभी मांगों को ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया।

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